चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, लखनऊ

 

i) न्यू इंटीग्रेटेड टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण

क्षेत्रफल 1,11,367 वर्ग मीटर (20461 वर्गमीटर के बेसमेंट और उसे जोड़ने वाले 6646 वर्गमीटर क्षेत्र के गलियारे सहित)|
वार्षिक क्षमता 13.6 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 4000 यात्री (3200 घरेलू और 800 अंतर्राष्ट्रीय)
परियोजना लागत रुपये 1383 करोड़
परियोजना की शुरूआत सितम्बर 2018
पूर्ण होने की संभावित तिथि सितम्बर 2021

लखनऊ शहर के जारी विकास के परिणामस्वरूप हवाई अड्डे से गुजरने वाले घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय, दोनों प्रकार के यात्रियों की संख्या में वृद्धि होगी। पूर्वानुमान है कि अगले दशक में हवाई अड्डे में प्रति वर्ष 10 मिलियन से अधिक यात्रियों की वृद्धि होगी ।

टर्मिनल की वास्तुकला के माध्यम से उत्तर प्रदेश के प्रमुख केंद्रीय शहर के रूप में लखनऊ की स्थिति को व्यक्त करने का प्रयास किया जाएगा । भवन के आर्किटेक्चर द्वारा संस्कृति और पारंपरिक वास्तुकला को मजबूती से प्रस्तुत किया जाएगा । आने-जाने वाले यात्री भी इस पहचान और स्थान के संदर्भ को महसूस करेंगे । भवन में आधुनिक संरचना से मेल खाती हुई सौंदर्यपूर्ण और आकर्षक आंतरिक सजावट उपलब्ध करायी जाएगी । नए टर्मिनल को इस प्रकार से डिज़ाइन किया जाएगा कि एक ही इमारत से अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू, दोनों प्रकार की उड़ानें संचालित होंगी और वहां प्रति घंटे 4000 यात्रियों तक को प्रोसेस करने की क्षमता होगी ।

 

 

चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, चेन्नई

 

i) नई एकीकृत टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण और संबद्ध कार्य

क्षेत्रफल 236044 वर्ग मीटर
वार्षिक क्षमता 22.54 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 5000 यात्री (4100 घरेलू + 400 अंतर्राष्ट्रीय)
परियोजना लागत रु० 1342 करोड़
परियोजना की शुरूआत 04.07.2018
पूर्ण होने की प्रस्तावित तिथि अगस्त 2022

तेजी से हो रहे विकास, मौजूदा टर्मिनल भवनों के विस्तार की और गुंजाइश न होने और सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की आवश्यकता ने भाविप्रा को आधुनिकीकरण के दूसरे चरण की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया। इसमें मौजूदा घरेलू टर्मिनल टी-2 और अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल टी-3 को गिराने और उनका 2 स्तरों में पुनर्निर्माण करना शामिल है। टर्मिनल का डिज़ाइन स्थानीय कला और संस्कृति के पारंपरिक रूप; विशेषत: भरतनाट्यम नृत्य की पारंपरिक वेशभूषा से लिया गया है । इसे विशाल छत में महसूस किया जा सकता है जो कपड़े पर लहरों की गति और उसकी चमक को प्रतिबिंबित करता है। हल्की सी घुमावदार संरचना हवाई अड्डे के सभी टर्मिनलों को एक-दूसरे से जोड़ती है और इसे एकीकृत रूप प्रदान करती है। चुन्नटनुमा गोलाकार छत के अंतिम छोर पर प्राकृतिक प्रकाश प्रदान करने के साथ-साथ धुएं को बाहर निकालने का स्थान भी उपलब्ध कराया गया है। फोरकोर्ट रोड पर कैंटिलीवर तरीके से छत का निर्माण कर स्वागत स्थान निर्मित किया जाएगा जो यात्रियों और आगंतुकों को प्रतिकूल मौसम से भी बचाएगा|

आतंरिक सज्जा के लिए ‘कोलम’ से प्रेरणा ली गई है। ऐसी अवधारणा है कि कोलम्स उस स्थान पर समृद्धि और सकारात्मकता लाते हैं । स्थानीय कलाकृतियाँ, मूर्तियां, कोलम से प्रेरित होकर लिए गए अमूर्त चित्र और स्थानीय शिल्प हवाई अड्डे को स्थानीय साजसज्जा के साथ-साथ आधुनिक रूप भी प्रदान करेंगे।

स्थानीय आधार पर उपलब्ध सामग्री जैसे ग्रेनाइट और इकोफ्रेंडली सामग्री का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा। समग्र सेटिंग से हवाई अड्डे को 4 स्टार जीआरआईएचए (GRIHA) रेटिंग प्राप्त करने में मदद मिलेगी। वास्तव में यह एक इकोफ्रेंडली हवाई अड्डा होगा !

ii) एयरसाइड इन्फ्रास्ट्रक्चर का उन्नयन

आधुनिकीकरण और अपग्रेडेशन की मांगों को पूरा करने के लिए, एयरसाइड का संवर्धन भी प्रगति पर है।

रनवे ऑक्यूपैन्सी समय को कम करने के लिए उन्नयन कार्य यथा मुख्य रनवे 07/25 के लिए 3 आरईटी और सेकेंडरी रनवे 12/30 के लिए 2 आरईटी का निर्माण, समानांतर टैक्सी-ट्रैक को सीधा करना, कोड 'ई' विमानों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मौजूदा एप्रन और टैक्सीवे को मजबूत बनाना इत्यादि निर्माणाधीन थे। । एप्रन क्षमता को बढ़ाने के लिए मार्स (MARS) स्टैंड्स में एप्रन का पुनर्निर्माण भी शुरू किया गया है।

 

 

लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, गुवाहाटी

 

i) नई एकीकृत टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण और संबद्ध कार्य

क्षेत्रफल 90000 वर्ग मीटर
वार्षिक क्षमता 12 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर यात्री (पीएचपी) क्षमता 4500 यात्री (4100 घरेलू + 400 अंतर्राष्ट्रीय)
परियोजना लागत रु० 1232 करोड़
परियोजना की शुरूआत अप्रैल 2018
पूर्ण होने की संभावित तिथि जून 2021

एलजीबीआई एयरपोर्ट गुवाहाटी में यात्रियों के तेजी से बढ़ रहे आवागमन के प्रबंधन के लिए यहाँ एक नई एकीकृत टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा है। इमारत की संरचना आरसीसी मिश्रित है जो अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं से सुसज्जित है। इमारत के अंदरूनी हिस्से राज्य के स्थानीय हस्तशिल्प, भित्ति चित्र और पर्यटन स्थलों को चित्रित करेंगे। शहर की ओर के भाग को खूबसूरती के साथ हरा-भरा बनाया जाएगा। यात्रियों को प्रकृति से जोड़ने के लिए न्यू टर्मिनल बिल्डिंग के भीतर और बाहर हरे-भरे क्षेत्र उपलब्ध कराए गए हैं। एक छोटे से आंतरिक हरे वन की सुविधा, बांस की कलाकृतियां और एक शिल्प गांव समग्र डिज़ाइन में जोड़े गए हैं, जो क्षेत्र के समृद्ध लोकाचार और संस्कृति पर प्रकाश डालते हैं। भवन का डिज़ाइन इस प्रकार बनाया गया है कि सार्वजनिक क्षेत्रों में प्राकृतिक उजाला रहे जो कि यात्रियों को स्वाभाविक रूप से सुकून प्रदान करेगा। इमारत की डिज़ाइनिंग इस प्रकार से की गई है जिससे इसे जीआरआईएचए (GRIHA) 4 स्टार रेटिंग प्राप्त हो।

 

 

जयप्रकाश नारायण हवाई अड्डा, पटना

 

i) नई एकीकृत टर्मिनल बिल्डिंग और अन्य संबद्ध कार्य

वार्षिक क्षमता 8.0 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर यात्री (पीएचपी) क्षमता 3000 यात्री (2500 घरेलू + 500 अन्तर्राष्ट्रीय)
परियोजना लागत रु० 1216.90 करोड़
परियोजना की शुरूआत अक्तूबर 2018
पूर्ण होने की प्रस्तावित तिथि अक्तूबर 2022

पटना की मौजूदा टर्मिनल बिल्डिंग प्रति वर्ष 2.5 मिलियन यात्रियों को संभालने में सक्षम है। वर्ष 2018-19 में ट्रैफिक 4.06 मिलियन रहा जो वर्ष 2017-18 की तुलना में 30.6% अधिक था। बढ़ रही ट्रैफ़िक मांग को पूरा करने हेतु प्रति वर्ष 8 मिलियन यात्रियों की क्षमता का एक नया एकीकृत टर्मिनल भवन बनाया जा रहा है, जिसमें नए तकनीकी ब्लॉक सह कंट्रोल टॉवर, फायर स्टेशन कैट.VII, कार्गो, 1000 कारों के लिए मल्टी लेवल कार पार्किंग, ई एंड एम वर्कशॉप और 5 इन-कॉन्टेक्ट बे तथा 6 रिमोट बे के लिए एप्रन विस्तार जैसे संबद्ध कार्य भी सम्मिलित हैं।

आगामी नई टर्मिनल बिल्डिंग एक आधुनिक आइकॉनिक संरचना होगी। भवन का डिज़ाइन प्राचीन साम्राज्य मगध के नालंदा विश्वविद्यालय से प्रेरित है। यह दो मंजिला टर्मिनल होगा, जिसके भू-तल पर आगमन और प्रथम तल पर प्रस्थान होगा, जो फ्लाईओवर के माध्यम से जुड़ा होगा । सर्विसेज़ और बैगेज मैनेजमेंट सिस्टम का प्रावधान बेसमेंट में किया गया है। टर्मिनल बिल्डिंग में ऊर्जा की किफ़ायत सुनिश्चित की जाएगी और इसे जीआरआईएचए (GRIHA)-4स्टार प्रमाणन प्राप्त होगा। यह एक आरसीसी कम्पोज़िट संरचना होगी जो अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं से सुसज्जित होगी। आगमन तल से बाहर निकलने वाले यात्रियों को मधुबनी गार्डन में विभिन्न प्रकार के फूल, फव्वारे और पैटर्न फ़्लोरिंग का सुखद अनुभव प्राप्त होगा।

 

 

वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पोर्ट ब्लेयर

 

i) नई घरेलू टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण

क्षेत्रफल 40837 वर्गमीटर
वार्षिक क्षमता 4.0 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 1200 यात्री (1000 घरेलू + 200 अन्तर्राष्ट्रीय)
परियोजना लागत

(टर्मिनल और एटीसी टॉवर के लिए )
रुपये 772.46 करोड़
परियोजना की शुरूआत जनवरी 2017
पूर्ण होने की प्रस्तावित तिथि दिसंबर 2020

पोर्ट ब्लेयर हवाई अड्डे पर पर्यटकों का आगमन बढ़ने के कारण यात्री आवाजाही में तीव्र वृद्धि हुई है। इस बढ़ी हुई मांग से निपटने के लिए, वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, पोर्ट ब्लेयर में एक नयी एकीकृत टर्मिनल बिल्डिंग बनायी जानी प्रस्तावित है। टर्मिनल बिल्डिंग दोनों घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को ध्यान में रखकर बनायी जाएगी, जिसका अद्वितीय डिज़ाइन पोर्ट ब्लेयर की धरती पर पैर रखते ही यात्रियों का स्वागत सूर्य, रेत और तरंगों के साथ करेगी।

प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर इस स्थान में; यही तर्कसंगत था कि नए टर्मिनल के निर्माण की प्रेरणा प्रकृति से ली जाए, जिसमें द्वीप के रेतीले समुद्र तट प्रमुख हैं। प्रेरणा के लिए समुद्र की सीपियों के साथ-साथ, 'प्रकृति से विकसित' डिज़ाइन की अवधारणा ने एक भवन के रूप में आकार लिया है।

ii) एयरपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और न्यू एप्रन का विस्तार

नई टर्मिनल बिल्डिंग के निर्माण और बढ़ती ट्रैफिक डिमांड के अनुरूप, कोड ‘सी' के अतिरिक्त 4 विमानों को समायोजित करने के लिए लिंक टैक्सी ट्रैक के साथ एप्रन का विस्तार प्रस्तावित है। परियोजना पर लगभग रु. 100 करोड़ के व्यय और दिसंबर, 2020 तक इसके पूरा होने की संभावना है।

 

 

तिरुचिरापल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, तिरुचिरापल्ली

 

i)  न्यू इंटीग्रेटेड टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण एवं सम्बद्ध कार्य

क्षेत्रफल 55217 वर्गमीटर
वार्षिक क्षमता 3.5 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 2900 यात्री (600 घरेलू + 2300 अन्तर्राष्ट्रीय)
परियोजना लागत रुपये 564 करोड़
परियोजना की शुरूआत अक्टूबर 2018
पूर्ण होने की प्रस्तावित तिथि अक्टूबर 2021

हवाई अड्डे पर तेजी से बढ़ते यात्री आवागमन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए त्रिची हवाई अड्डे पर नए दो मंजिला एकीकृत टर्मिनल भवन का निर्माण शुरू हो गया है। बहुस्तरीय रंगीन पारंपरिक वास्तुकला की प्रेरणा को समकालीन रूप से प्रतिबिंबित करने के लिए नए टर्मिनल की वास्तुकला त्रिची को एक महत्वपूर्ण आकर्षक स्थान के रूप में प्रस्तुत करेगी। छत का डिज़ाइन विशिष्ट है क्योंकि यह संरचना को एक प्रतिष्ठित रूप देता है। बिल्डिंग के अंदरूनी भाग में शहर के रंगों और संस्कृति को दर्शाया गया है, जिसमें समकालीन तरीके से सामग्री और टेक्सचर का प्रयोग किया गया है।

नई टर्मिनल बिल्डिंग का सहज रूप दक्षिणी क्षेत्र में एक अद्वितीय वास्तुशिल्प पहचान बनाएगा और टर्मिनल के डिज़ाइन में एक नया आयाम जोड़ेगा। इमारत की वास्तुकला द्वारा स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक वास्तुकला की मजबूत झलक व्यक्त की जाएगी । आने-जाने वाले यात्री इन धरोहरों की पहचान कर पाएंगे और उन्हें अपनेपन का एहसास होगा। दिन के उजाले को अधिकतम करके इमारत को पर्यावरण के अनुकूल डिज़ाइन किया गया है और इसमें टिकाऊ निर्माण सामग्री का उपयोग जीआरआईएचए(GRIHA) 4-स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है।

ii) एयरसाइड इंफ्रा का अपग्रेडेशन

ए-321/ए-320 प्रकार के 10 विमानों के लिए संबंधित लिंक टैक्सीवे, जीएसई एरिया और आइसोलेशन बे सहित नया एप्रन तथा ए-321/ए-320 प्रकार के विमान के लिए लिंक टैक्सी-ट्रैक।

 

 

कुशोक बकुला रिम्पोचे हवाई अड्डा, लेह

 

i) नए घरेलू टर्मिनल भवन का निर्माण

क्षेत्रफल 18,985 वर्गमीटर
वार्षिक क्षमता 1.6 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 800
परियोजना लागत रुपये 480 करोड़
परियोजना की शुरूआत सितंबर 2018
पूर्ण होने की संभावित तिथि सितंबर 2021

पिछले कुछ वर्षों में लेह हवाई अड्डे पर यात्री आवाजाही में अत्यधिक वृद्धि हुई है। पिछले 4 वर्षों में चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 20.3% रही। इसलिए, तेजी से बढ़ती यात्री आवाजाही संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लेह में एक नए घरेलू टर्मिनल भवन की आवश्यकता है। सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ सहज यात्री आवाजाही प्रदान करने के लिए एक मॉड्यूलर, ऊर्जा किफ़ायती और आत्मनिर्भर यात्री टर्मिनल भवन का निर्माण प्रस्तावित है। बिल्डिंग का डिज़ाइन प्राचीन बौद्ध दर्शन और आधुनिक लोकाचार की बेजोड़ मिसाल है जो इमारत के समग्र स्वरूप और उसके एहसास में बौद्ध डिज़ाइन के तत्वों को बारीकी से प्रस्तुत करता है। स्थानीय कला और संस्कृति को टर्मिनल भवन के वास्तुकला डिज़ाइन में सम्मिलित किया गया है। डिज़ाइन का दृष्टिकोण, डबल इंसुलेटेड रूफिंग और वॉल सिस्टम, सेंसर के साथ एलईडी प्रकाश व्यवस्था, वीएफडी के साथ ऊर्जा किफ़ायती चिलर, सौर ऊर्जा प्रणाली, भूजल स्तर और 165 केएलडी क्षमता के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को रिचार्ज करने के लिए वर्षा जल संचयन प्रणाली को डिज़ाइन में प्रमुखता दी गई है। डिज़ाइन का लक्ष्य जीआरआईएचए (GRIHA) 4-स्टार रेटिंग प्राप्त करना है।

ii) एयरसाइड इंफ्रा का अपग्रेडेशन

रनवे का 396 मीटर (18 साइड पर) का विस्तार, आरसीसी बाउंड्री वॉल का निर्माण और संबद्ध सेफ्टी और सिक्युरिटी अवसंरचना कार्य । यह कार्य मई-2020 तक पूरा होने की उम्मीद है।

 

 

नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, कोलकाता

 

i) एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर सह तकनीकी ब्लॉक का निर्माण और संबद्ध कार्य

क्षेत्रफल 27507 वर्गमीटर
कैटेगरी कैट.I
परियोजना लागत रुपये 458 करोड़
परियोजना की शुरूआत अगस्त 2017
पूर्ण होने की संभावित तिथि दिसंबर 2020

मौजूदा कंट्रोल टॉवर बिल्डिंग पुराने घरेलू और पुराने अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल भवनों के बीच स्थित है जहाँ बहुत सीमित क्षेत्र उपलब्ध है। मौजूदा संरचना को दो हिस्सों में बांटने के लिए जगह की कमी है, जिसमें और अधिक उपकरणों और कार्यालय कर्मियों को समायोजित नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा, चल रहे विस्तार और क्षमता वृद्धि कार्यों को ध्यान में रखते हुए, मौजूदा भवन को ध्वस्त करने की आवश्यकता है। इसलिए बढ़ती विमानन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक नया एटीसी टावर और तकनीकी ब्लॉक बनाया जा रहा है।

ii) एयर साइड इन्फ्रास्ट्रक्चर, एफ टैक्सी ट्रैक और न्यू एप्रन बे का विस्तार

यात्री यातायात में बड़ी वृद्धि और आरसीएस योजना के कार्यान्वयन के कारण, कोलकाता हवाई अड्डे पर एप्रन क्षमता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता थी। इस बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए ‘एफ’ टैक्सी ट्रैक और 3 रैपिड एग्ज़िट टैक्सी (आरईटी) ट्रैक के विस्तार के साथ ‘सी’ कैटेगरी हेतु 23 पार्किंग बे और ‘ई’ कैटेगरी हेतु 3 पार्किंग बे की योजना बनाई गई है तथा हवाई अड्डे के इष्टतम उपयोग हेतु एयरसाइड क्षमता बढ़ाने के लिए निर्माण कार्य शुरू किया गया है। परियोजना की कुल लागत रु. 264.99 करोड़ है और जिसके नवंबर, 2021 तक पूरा होने की संभावना है।

iii) हैंगर और संबद्ध एप्रन बे का निर्माण

एनएससीबीआई हवाई अड्डा, कोलकाता में हैंगरों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए, मुख्य रनवे के पूर्वी हिस्से में तीन कैटेगरी ‘सी' के हैंगर और लिंक टैक्सी वे सहित कनेक्टिंग एप्रन का कार्य निर्माणाधीन है। परियोजना की लागत रु. 143.4 करोड़ है और जिसके जनवरी, 2021 तक पूरा होने की संभावना है।

 

 

जॉली ग्रांट डोमेस्टिक एयरपोर्ट, देहरादून

 

i) न्यू इंटीग्रेटेड टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण एवं सम्बद्ध कार्य

क्षेत्रफल 37,700 वर्गमीटर
वार्षिक क्षमता 3.65 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 1800 यात्री (900 प्रस्थान+ 900 आगमन)
परियोजना लागत रुपये 457 करोड़
परियोजना की शुरूआत अगस्त 2018
पूर्ण होने की संभावित तिथि सितम्बर 2020

सभी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित पैसेंजर टर्मिनल, शहर की संस्कृति और परंपराओं को व्यक्त करने का प्रयास करता है। परियोजना के लिए पीएमसी कंसल्टेंट्स मेसर्स डॉर्स कंसल्ट इंडिया प्रा. लिमिटेड हैं। स्थानीय तौर पर उपलब्ध लकड़ी व स्लेट जैसी सामग्री के अलावा पारंपरिक कथ कुनी वास्तुकला शैली को आंतरिक डिज़ाइन में अपनाया गया है। इसके अग्रभाग का डिज़ाइन देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान से प्रेरित है। लैंडस्केप स्थानीय जलवायु, संस्कृति, वनस्पतियों और जीवों से प्रेरित है जो परिवेश से भली प्रकार मेल खाता है । छत को दोहरे घुमाव के साथ डिज़ाइन किया गया है जो कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग में सहायता प्रदान करने के साथ-साथ टर्मिनल की गर्मी को कम करने में सहायक सिद्ध होगी । इसके ऊर्जा किफ़ायती फिक्स्चर्स तथा सौर ऊर्जा प्रणाली और उल्लिखित सुविधाएँ इस भवन को जीआरआईएचए(GRIHA) 4-स्टार रेटिंग संरचना बनाने में मदद करेंगी। मल्टी-लेवल कार पार्किंग में 500 कारों की क्षमता होगी और साथ ही 11 वीआईपी कार पार्किंग की भी व्यवस्था होगी।

ii) नए 12 विमानों के लिए एप्रन का निर्माण और अन्य नियोजित एयरसाइड कार्य

अपने बढ़ते यातायात आवागमन को पूरा करने के लिए, देहरादून हवाई अड्डे ने 06 कोड ’सी’ और 06 कोड ‘बी’ प्रकार के विमानों की पार्किंग के लिए एप्रन का निर्माण शुरू किया है। यह हवाई अड्डे की कुल विमान पार्किंग क्षमता को 20 बे (10 कोड ‘सी’ और 10 कोड ‘बी’ प्रकार के विमान) तक ले जाएगा। यह कार्य अगस्त 2020 तक पूरा होने की उम्मीद है।

एप्रन के विस्तार के साथ-साथ रनवे और टैक्सीवे का सुदृढ़ीकरण भी प्रगति पर है और इसके सितंबर 2020 तक पूरा होने की संभावना है।

 

 

महाराज बीर बिक्रम एयरपोर्ट, अगरतला

 

i) न्यू इंटीग्रेटेड टर्मिनल बिल्डिंग और ए-321 प्रकार के विमानों के लिए 6 अतिरिक्त पार्किंग बे हेतु एप्रन का निर्माण

क्षेत्रफल 25000 वर्गमीटर
वार्षिक क्षमता 3 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर यात्री (पीएचपी) क्षमता 1200 यात्री (1000 घरेलू + 200 अन्तर्राष्ट्रीय )
परियोजना लागत रुपये 438.28 करोड़
कार्य की शुरूआत जून 2017
पूर्ण होने की संभावित तिथि जून 2020

टर्मिनल का डिज़ाइन सरल और सुरुचिपूर्ण है । बिल्डिंग के अंदर और बाहर दोनों जगह हरे-भरे क्षेत्र उपलब्ध हैं जो यात्रियों और आगंतुकों को प्रकृति से जोड़ते हैं। अगरतला में आसानी से पाई जाने वाली बांस की कलाकृतियों और फर्नीचर को बड़े पैमाने पर भवन के अंदरूनी हिस्सों में सजाया गया है। राज्य में राजस्व सृजन को बढ़ावा देने के लिए इनका उपयोग किया गया है।

बिल्डिंग का डिज़ाइन इस प्रकार बनाया गया है कि दिन की रोशनी का भरपूर उपयोग किया जा सके। सार्वजनिक क्षेत्रों की प्रकाश व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है क्योंकि विभिन्न स्तर की प्रकाश व्यवस्था से क्षेत्र की गतिविधियों और आंतरिक वास्तुकला को और उभारा जा सकेगा। बड़े सार्वजनिक क्षेत्रों में प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों प्रकार की अप्रत्यक्ष प्रकाश व्यवस्था प्रस्तावित है। बिल्डिंग को जीआरआईएचए (GRIHA) 4-स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए ऐसी सामग्री उपयोग में लाई जा रही है, जिसका रखरखाव कम हो और ऊर्जा के उपयोग को अधिकतम करने की दृष्टि से इसे डिज़ाइन किया गया है।

 

 

पुणे एयरपोर्ट

 

i) न्यू इंटीग्रेटेड टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण

क्षेत्रफल 48000 वर्गमीटर
वार्षिक क्षमता 9.0 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 2300 यात्री
अवार्ड की गई लागत रुपये 358.89 करोड़
शुरूआत अक्टूबर, 2018
पूर्ण होने का प्रस्तावित समय अप्रैल, 2021

यात्रियों के तेजी से बढ़ते आवागमन की मांग को पूरा करने के लिए पुणे में एक नयी एकीकृत टर्मिनल बिल्डिंग बनायी जा रही है। परियोजना को एकरूपता प्रदान करने के लिए पुरानी और नई दोनों इमारतों को निरंतर और सहज रूप में एकीकृत किया जा रहा है। पुरानी और नयी टर्मिनल बिल्डिंग को शहर की ओर कैनोपी द्वारा एकीकृत किया गया है, जिसमें शनिवार वाड़ा फ़ोर कोर्ट, प्रवेश द्वार और उद्यान, आगा खान महल, महात्मा फुले मार्केट, राष्ट्रीय नायक अर्थात छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि, पार्वती हिल्स मंदिर, गणेश चतुर्थी आदि के प्रभाव को दर्शाने वाले लाउवर हैं। टर्मिनल बिल्डिंग जीआरआईएचए(GRIHA) अनुरूप है और जीआरआईएचए(GRIHA) प्रमाणीकरण के लिए आवेदन किया गया है।

 

 

जबलपुर एयरपोर्ट

 

i) नई घरेलू टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण

क्षेत्रफल 10000 वर्गमीटर
वार्षिक क्षमता 1.0 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 500 यात्री
परियोजना लागत

(टर्मिनल और एटीसी टॉवर के लिए)
रुपये 140.49 करोड़
परियोजना की शुरूआत मई, 2019
पूर्ण होने की संभावित तिथि जून, 2021

बढ़ती ट्रैफिक डिमांड को पूरा करने के लिए एक नए घरेलू टर्मिनल भवन का प्रस्ताव किया जा रहा है और हवाई अड्डे को एबी-320 प्रकार के विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त बनाया जाएगा | हवाई अड्डे के उन्नयन को समग्र रूप से लिया गया है। छत का रूप, भेड़ाघाट की संगमरमर की चट्टानों द्वारा निर्मित त्रिकोणीय पिरामिड/टेट्राहेड्रॉन आकृतियों पर आधारित है | वही दृष्टिकोण भवन के अंदरूनी हिस्सों में भी अपनाया गया है। भेड़ाघाट की मार्बल रॉक घाटियों, धुनुवाधार फॉल्स, बाग ब्लॉक प्रिंट, गोंद कलाकृतियों से प्रेरित होकर इन्हें एयरपोर्ट डिज़ाइन में स्थान दिया गया है। दीवारों को मार्बल रॉक टेक्सचर पैनलों से तैयार किया गया है।

ii) एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर सह तकनीकी ब्लॉक का निर्माण और संबद्ध कार्य

क्षेत्रफल 3728 वर्गमीटर
कैटेगरी कैट. III (आईएमडी II)
परियोजना की शुरूआत मई, 2019
पूर्ण होने की प्रस्तावित तिथि जून, 2021

मौजूदा कंट्रोल टॉवर बिल्डिंग एप्रन के बहुत नज़दीक है। वर्तमान सुविधाओं का एरिया बहुत कम है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इमारत अत्यंत जीर्ण अवस्था में है। बिल्डिंग छोटी है और यहाँ एरिया कंट्रोल सेंटर को दो हिस्सों में विभाजित करने के लिए जगह की कमी है | साथ ही अधिक उपकरणों और कार्यालय कर्मियों को समायोजित करने के लिए कंट्रोल टॉवर बहुत छोटा है। मौजूदा टॉवर की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए तथा बढ़ती विमानन आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से एक नया एटीसी टॉवर प्रस्तावित किया गया था।

iii) रनवे और न्यू एप्रन का विस्तार

वर्तमान एप्रन रनवे पट्टी के भीतर आता है और यहाँ केवल एक विमान को खड़ा करने की क्षमता है। डीजीसीए (DGCA) सीएआर (CAR) का पालन करने और बढ़ती ट्रैफिक डिमांड को ध्यान में रखते हुए न्यू टर्मिनल बिल्डिंग के साथ-साथ एबी-320 प्रकार के विमानों के लिए 4 पार्किंग बे सहित नए एप्रन का निर्माण प्रस्तावित किया गया है। रनवे को 1988 मी की वर्तमान लंबाई से बढ़ाकर 2750 मीटर किया जाएगा, कार्य फरवरी 2018 से शुरू किया जा चुका है और रुपये 150.09 करोड़ की लागत से इसके अगस्त 2020 तक पूरा होने का अनुमान है।

 

 

सूरत अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा, सूरत

 

i) एकीकृत टर्मिनल भवन का विस्तार

क्षेत्रफल कुल = 25520 वर्गमीटर।

=8474 वर्गमीटर (मौजूदा) + 17046 वर्गमीटर (विस्तार)
वार्षिक क्षमता 2.6 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 1800 यात्री
परियोजना लागत रुपये 138.48 करोड़
परियोजना की शुरूआत मई 2019
पूर्ण होने की संभावित तिथि फरवरी 2021

सूरत से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की मांग को पूरा करने और घरेलू यातायात को बढ़ाने के लिए मौजूदा घरेलू टर्मिनल को एकीकृत टर्मिनल में विस्तारित और उसमें सुधार करने की आवश्यकता महसूस की गई। इसकी डिज़ाइनिंग के पीछे का उद्देश्य मौजूदा भवन की विशेषताओं जैसे कि भवन के बाहरी आवरण और छत की बाहरी रूपरेखा का प्रस्तावित टर्मिनल के साथ मिलान करना व उसका उन्नयन करना है। इसलिए टर्मिनल के स्वरूप को बनाए रखने के लिए समरूप छत डाल दी गई है। टर्मिनल के साथ, एक लैंडस्केप विकसित किया गया है, जो "पाटन पटोला" नामक स्थानीय टैक्स्टाइल शैली पर आधारित है। शहर और क्षेत्र की औद्योगिक विरासत और सांस्कृतिक लोकाचार को प्रदर्शित करने के लिए आंतरिक साज-सज्जा में टैक्सटाइल शैली और मोटिफ्स को शामिल किया गया।

ii) समानांतर टैक्सी ट्रैक का निर्माण और एप्रन का विस्तार

ट्रैफिक की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए टर्मिनल बिल्डिंग के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया। समानांतर टैक्सी ट्रैक सहित एबी-320 प्रकार के विमान के लिए 10 नंबर के पार्किंग बे हेतु एप्रन के विस्तार का काम जुलाई,2019 को शुरू हुआ है, जिसमें फरवरी,2021 की पीडीसी है। अधिनिर्णित लागत रु.63.13 करोड़ है।

 

 

डाबोलिम हवाई अड्डा, गोवा

 

i) एकीकृत टर्मिनल भवन का विस्तार

क्षेत्रफल 18300 वर्गमीटर
वार्षिक क्षमता 2.0 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री) कुल क्षमता (7.65+2.0)=9.65 एमपीपीए
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 4000 यात्री
परियोजना लागत रुपये 132.69 करोड़
परियोजना की शुरूआत दिसम्बर 2019
पूर्ण होने की संभावित तिथि सितम्बर 2021

चूंकि गोवा देश की 93% से अधिक अंतरराष्ट्रीय चार्टर पर्यटक उड़ानों के लिए उत्तरदायी है और यहाँ दोनों, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों में भारी वृद्धि के कारण मौजूदा टर्मिनल की अवसंरचना को अपग्रेड करने की तीव्र आवश्यकता महसूस की गई। इसलिए, डाबोलिम हवाई अड्डे पर एकीकृत टर्मिनल भवन के विस्तार का कार्य प्रगति पर है।

यात्रियों के अनुभव से किसी प्रकार का समझौता किए बिना इसका डिज़ाइन टर्मिनल की मौजूदा टाइपोलॉजी और उसके मौजूदा अग्रभाग के अनुसार होगा। इसका प्रमुख प्रयोजन गोवा की संस्कृति और कलाकृति को आंतरिक और बाहरी दोनों भागों में इस प्रकार से दर्शाने का है जिससे यात्री गोवा की संस्कृति को समझ सकें व उसका अनुभव कर सकें। इसका डिज़ाइन न केवल छत को ऊष्मा-रोधी होने का प्राकृतिक तरीका प्रदान करता है, बल्कि स्वत: ही जीआरआईएचए-4 (GRIHA) स्टार के अनुपालन की दिशा में एक कदम और नजदीक ले आता है।

 

 

सिविल एन्क्लेव, कानपुर चकेरी

 

i) नई टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण

क्षेत्रफल 6250 वर्गमीटर
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 300 यात्री
परियोजना लागत रुपये 105.47 करोड़
परियोजना कीशुरूआत अक्टूबर 2019
पूर्ण होने की संभावित तिथि फरवरी 2021

कानपुर उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा शहर है और व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र है। यह मुख्य दिल्ली-हावड़ा ट्रंक लाइन्स और पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित है। कानपुर हवाई अड्डा भारतीय वायु सेना के अधीन है और भाविप्रा द्वारा सिविल एन्क्लेव का रखरखाव किया जाता है। मौजूदा टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण 1975 में 750 वर्गमीटर क्षेत्र में व्यस्ततम समय में 50 (25प्रस्थान+ 25आगमन) यात्रियों को हैंडल करने की क्षमता के साथ किया गया था।

भाविप्रा ने आईएमजी मानदंडों के अनुसार सभी आधुनिक सुविधाओं सहित एक नई यात्री टर्मिनल बिल्डिंग की योजना तैयार की है। बिल्डिंग की समग्र योजना स्थानीय वास्तुकला की विशेषताओं को प्रतिबिम्बित करेगी और यह टर्मिनल बिल्डिंग की डिजाइन संबंधी विशेषताओं का हिस्सा होगी। कॉमन कॉनकोर्स एरिया में मीट-एंड-ग्रीट एरिया, स्नैक बार, फैसिलिटेशन काउंटर्स, टॉयलेट, एएचयू स्विच रूम, पीने के पानी की सुविधाएं, कमर्शियल सुविधाओं के लिए एरिया आदि का प्रावधान होगा।

 

 

आदमपुर हवाईअड्डा

 

i) नई घरेलू टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण

क्षेत्रफल 7920 वर्गमीटर (कैनोपी सहित)
वार्षिक क्षमता 0.6 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 300
परियोजना मूल्य रुपये 115 करोड़
परियोजना की शुरूआत मार्च 2019
पूर्ण होने की संभावित तिथि जून 2020

नई घरेलू टर्मिनल बिल्डिंग को इस प्रकार से डिज़ाइन किया गया है कि यह सभी आवश्यक यात्री अनुकूल साधनों से सुसज्जित हो तथा सेंट्रली वातानुकूलित हो और बीएमएस, चेक-इन-काउंटर्स, बैगेज कन्वेयर्स, फ्रिस्किंग बूथ, एक्स-रे मशीन, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, फायर फाइटिंग और फायर अलार्म सिस्टम, फ्लाइट इंफर्मेशन डिस्प्ले सिस्टम (एफआईडीएस), एससीसीटीसी, बैगेज स्कैनर्स और 150 कारों के लिए कार पार्किंग की सुविधाओं से युक्त हो। स्थानीय कला और संस्कृति को टर्मिनल बिल्डिंग के वास्तुकला डिज़ाइन में शामिल किया गया है। डिज़ाइन की पद्धति डबल इंसुलेटिड रूफिंग सिस्टम, एलईडी लाइटिंग, लो हीट ग्लेज़िंग, वीएफडीस के साथ एनर्जी ऐफिशिएंट चिलर्स, सोलर पॉवर सिस्टम, भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, 100 केएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम के उपयोग से निरंतरता को भी प्रकट करती है। डिज़ाइन का मुख्य उद्देश्य जीआरआईएचए (GRIHA) 4 स्टार रेटिंग प्राप्त करना है।

 

 

दरभंगा हवाईअड्डा

 

i) इंटरिम टर्मिनल बिल्डिंग

क्षेत्रफल 1400 वर्गमीटर
वार्षिक क्षमता 1.0 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 100 यात्री
परियोजना लागत रुपये 76 करोड़
परियोजना की शुरूआत सितम्बर 2018
पूर्ण होने की संभावित तिथि जून 2020

दरभंगा हवाईअड्डा भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के अंतर्गत आता है। उडान-2 (UDAN-2) के तहत, स्पाइस जेट को दरभंगा-बेंगलुरु, दरभंगा-मुंबई, दरभंगा-दिल्ली मार्गों पर आरसीएस उड़ानों के संचालन के लिए सेलेक्ट एयरलाइन ऑपरेटर (एसएओ) के रूप में मान्यता दी गई है।

भाविप्रा दरभंगा में भारतीय वायुसेना से लीज़ पर ली गई 2.3 एकड़ भूमि पर एक इंटरिम सिविल एन्क्लेव विकसित कर रहा है जिसमें एक टर्मिनल बिल्डिंग शामिल है। यात्री विमान कोड 4सी टाइप की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए टर्मिनल बिल्डिंग के विस्तार हेतु 2.3 एकड़ भूमि के साथ जुडी हुई 2.42 एकड़ अतिरिक्त भूमि के लिए भारतीय वायुसेना से अनुरोध किया गया है।

 

 

मंगलूरू हवाईअड्डा

 

i) एनआईटीबी (आगमन साइड) का विस्तार जिसमें दो अतिरिक्त एरोब्रिज का प्रावधान शामिल है।

क्षेत्रफल 8483 वर्गमीटर
वार्षिक क्षमता 2.5 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 1100 यात्री
परियोजना लागत रुपये 95.80 करोड़
परियोजना की शुरूआत अप्रैल, 2018
पूर्ण होने की संभावित तिथि अगस्त 2020

मंगलूरू हवाई अड्डे की 18627 वर्ग मीटर के क्षेत्रफल वाली स्टील और कांच की संरचना से युक्त नवीन एकीकृत टर्मिनल बिल्डिंग अंतर्राष्ट्रीय मानकों की यात्री अनुकूल सुविधाओं से सुसज्जित है। सौंदर्यपूर्ण ढंग से की गई आंतरिक साज-सज्जा और कलाकृति उस क्षेत्र की वास्तुकला का सम्मिश्रण है जो उसकी भव्यता को बढ़ा रहा है।

क्षमता को बढ़ाने के लिए 3 अतिरिक्त आगमन कन्वेयर बेल्टों को जोड़कर क्षेत्र को 27110 वर्ग मीटर तक बढ़ा कर बिल्डिंग के विस्तार का प्रस्ताव किया गया है। फ्लाईओवर पर ट्रैफिक को सामान्य रखने के लिए आगमन से होने वाले निकास को लोअर ग्राउंड फ्लोर लेवल के द्वारा किये जाने की योजना बनाई गई है।

सौंदर्यपूर्ण ढंग से की गई आंतरिक साज-सज्जा के साथ विस्तारण और सुधार का कार्य बिल्डिंग की मौजूदा वास्तुकला के अनुरूप होगा।

ii) अन्य प्रमुख कार्य (एयरसाइड इंफ्रा का उन्नयन)

समानांतर टैक्सी ट्रैक फेज़-II के भाग का निर्माण और रनवे 06 की दक्षिण की ओर बेसिक स्ट्रिप की ग्रेडिंग और लेवलिंग और इलेक्ट्रिकल कार्यों सहित संबद्ध कार्य।

अतिरिक्त 3 कोड-सी के लिए मौजूदा एप्रन का विस्तार।

 

 

देवघर हवाईअड्डा

 

i) नई एकीकृत टर्मिनल बिल्डिंग और अन्य संबंधित कार्य

क्षेत्रफल 4000 वर्गमीटर
वार्षिक क्षमता एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 200 यात्री
200 यात्री रुपये 77.01 करोड़
परियोजना की शुरूआत मई 2019
पूर्ण होने की संभावित तिथि जून 2020

झारखंड राज्य में देवघर हवाई अड्डा दूसरा परिचालन हवाई अड्डा होगा। हवाई अड्डे को झारखंड सरकार और भाविप्रा के बीच एबी-320 / सी-130 (डीआरडीओ) प्रकार के विमान के लिए डीआरडीओ और जेवी के सहयोग से विकसित किया जा रहा है, जो 653.34 एकड़ भूमि क्षेत्र को कवर कर रहा है।

विकास कार्यों में टर्मिनल बिल्डिंग के कार्यों के अतिरिक्त तीन ए-320 प्रकार के विमान की पार्किंग के लिए एप्रन, रनवे, डीआरडीओ के लिए एक अलग एप्रन, आइसोलेशन बे, न्यू टेक्निकल ब्लॉक-कम-कंट्रोल टॉवर जैसी बिल्डिंग्स, फायर स्टेशन श्रेणी-VII, एमटी वर्कशॉप और प्रशासनिक ऑफिस बिल्डिंग भी शामिल हैं।

नई टर्मिनल बिल्डिंग एक आरसीसी कम्पोज़िट संरचना होगी, जो कि अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं से सुसज्जित होगी। टर्मिनल भवन की ऊँचाई बैद्यनाथ मंदिर के 'शिखर' के अनुरूप है। बिल्डिंग की आंतरिक साज-सज्जा में स्थानीय जन-जातीय हस्तशिल्प, मधुबनी कलाकृति और राज्य के पर्यटन स्थलों को दिखाया जाएगा, जो उस क्षेत्र के समृद्ध लोकाचार और संस्कृति को उजागर करेगा। यात्रियों को प्रकृति से जोड़ने के लिए शहर की ओर का लैंडस्केप हरे-भरे क्षेत्रों के साथ सौंदर्य से परिपूर्ण होगा।

 

 

कोल्हापुर हवाईअड्डा

 

i) नई घरेलू टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण

क्षेत्रफल 3900 वर्गमीटर
वार्षिक क्षमता 0.5 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 300 यात्री
अवार्ड किया गया मूल्य

(टर्मिनल एवं एटीसी टावर के लिए)
रुपये 61.67 करोड़
शुरूआत मई 2019
पूर्ण होने की प्रस्तावित तिथि मार्च 2021

कोल्हापुर में इस क्षेत्र के विमानन ढांचे के उन्नयन के लिए एक नई घरेलू टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा है।

मूर्त विरासत के प्रतीक के रूप में टर्मिनल बिल्डिंग में छत्रपति शाहूजी महाराज के महल की विशेषताएँ दिखाई देती हैं। टर्मिनल के सामने वाला हिस्सा किसी प्राचीन महल के समान है, जो उतुडंग है और बहु-धातु व नुकीले मेहराबों के मौलिक संयोजन को चित्रित करता है तथा जो शहर की ओर मुख करके अट्टालिका की भांति खड़ा है और आगंतुकों की स्मृति पर लंबे समय तक अपनी छाप छोड़ता है।

ii) एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर-कम-न्यू फायर स्टेशन का निर्माण

क्षेत्रफल 2700 वर्गमीटर
श्रेणी श्रेणी IV (आईएमडी-III)
प्रारम्भ का समय मई 2019
पूर्ण होने का प्रस्तावित समय मार्च 2021

उन्नयन सुविधाओं के प्रबंध के लिए न्यू एटीसी टॉवर-कम-तकनीकी ब्लॉक का कार्य चल रहा है।

iii) रनवे और एप्रन का विस्तार

एटीआर-72 प्रकार के विमानों के संचालन हेतु 3 पार्किंग बे सहित रनवे का मौजूदा 1370 मीटर से 1930 मीटर तक 560 मीटर का विस्तार। एबी-320 प्रकार के विमान के संचालन के लिए, राज्य सरकार से अनुरोधित 64 एकड़ भूमि की उपलब्धता के अधीन, रनवे को 1930 मीटर से और आगे 2300 मीटर तक बढ़ाया जाएगा। परियोजना की लागत रुपये 74.52 करोड़ है, जो कि अगस्त,2018 में शुरू हुई थी और जिसका फरवरी, 2021 तक पूरा होने की संभावना है।

 

 

जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा, राजस्थान

 

i) मौजूदा टर्मिनल बिल्डिंग (टी-2) का रूप परिवर्तन

क्षेत्रफल 23,000 वर्गमीटर
संयुक्त वार्षिक क्षमता (टी1+ टी2) 3.5 एमपीपीए (प्रति वर्ष मिलियन यात्री)
संयुक्त पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता (टी-1+टी2) 920 यात्री
परियोजना लागत रुपये 46 करोड़
परियोजना की शुरूआत दिसम्बर 2017
पूर्ण होने की संभावित तिथि मार्च 2020

18,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में बने मौजूदा टर्मिनल बिल्डिंग के मौजूदा प्रस्थान, इमिग्रेशन और आगमन हॉल में भीड़-भाड का अनुभव किया गया। टर्मिनल के माध्यम से बेहतर ट्रैफिक प्रवाह की अनुमति देने के लिए चेक-इन और बैगेज क्लेम एरिया में भीड़ कम करने हेतु अतिरिक्त प्रस्थान हॉल और आगमन हॉल को पूर्वी और पश्चिमी खंडो में जोड़ा गया।

ii) पुरानी टर्मिनल बिल्डिंग (टी-1) का नवीनीकरण, पुन: संयोजन और मरम्मत

क्षेत्रफल 11,350 वर्गमीटर
परियोजना मूल्य रुपये 67 करोड़
परियोजना की शुरूआत नवंबर 2018
पूर्ण होने की संभावित तिथि मार्च 2020

पुरानी टर्मिनल बिल्डिंग (टी -1), जो वर्तमान में कार्गो परिचालन के लिए उपयोग की जा रही है, उसे फिर से प्रचालन में लाने के लिए उसका नवीनीकरण, पुनःसंयोजन और उसकी मरम्मत की जा रही है। टर्मिनल बिल्डिंग (टी-1) टर्मिनल-2 के यात्री ट्रैफिक लोड को कम करेगा, और साथ ही यात्री ट्रैफिक हैंडलिंग की समग्र क्षमता को भी बढ़ाएगा।

iii) कार्गो कॉम्प्लेक्स का निर्माण

क्षेत्रफल 6832 वर्गमीटर
वार्षिक हैंडलिंग क्षमता 102000 एमटी
परियोजना लागत रुपये 24.5 करोड़
परियोजना की शुरूआत जनवरी 2019
पूर्ण होने की संभावित तिथि मार्च 2020

जयपुर में कार्गो कॉम्प्लेक्स का निर्माण हवाई अड्डे के दक्षिणी तरफ 13,572 वर्गमीटर के क्षेत्र में किया जा रहा है, जो यात्री सुविधा हेतु पुरानी टर्मिनल बिल्डिंग का उपयोग करने की अनुमति देगा।

iv) एप्रन, समानांतर टैक्सी ट्रैक (फेज़-I और फेज़-II) और अन्य संबद्ध एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण

वर्तमान में टैंगो टैक्सी से नल्लाह (फेज़-I) तक का समानांतर टैक्सी ट्रैक का कार्य चल रहा है और मार्च,2020 तक इसके पूरा होने की संभावना है।

नल्लाह से रनवे-27 तक पीटीटी का आगे का विस्तार कार्य प्रगति पर है और मार्च,2020 तक इसके पूरा होने की संभावना है।

हवाई अड्डे के अपग्रेडेशन के लिए योजनाबद्ध एएनएस कार्यों में अप्रोच रडार,एचपी डीएमई की स्थापना और एमएसएसआर का प्रतिष्ठापन करना शामिल है। इन्हें दिसंबर,2020 तक प्रतिष्ठापित किए जाने की संभावना है।

 

 

तेजू हवाईअड्डा, अरुणाचल प्रदेश

 

i) नई टर्मिनल बिल्डिंग, कंट्रोल टॉवर सह तकनीकी ब्लॉक सह फायर स्टेशन और संबंधित सुविधाओं का निर्माण।

क्षेत्रफल 4000 वर्गमीटर
पीक ऑवर हैंडलिंग (पीएचपी) क्षमता 200 यात्री
परियोजना लागत रुपये 54 करोड़
परियोजना की शुरूआत

(टीसीआईएल के साथ एमओयू)
अक्टूबर 2018
पूर्ण होने की संभावित तिथि जून 2020

टर्मिनल सभी आधुनिक यात्री सुविधाओं से सुसज्जित होगा, जिसमें ग्लास और स्टील के आवरण के साथ प्री-इंजीनियर्ड संरचना शामिल है जो कि स्टील ट्रस पर प्रोफाइल शीट रूफिंग वाली होगी | व्यापक और समग्र डिज़ाइनों की सुविधा से युक्त इंजीनियरिंग सेवाओं, जिनमें जन-स्वास्थ्य, विद्युत, बीएमएस, फायर डिटेक्शन और फाइटिंग, लैंडस्केपिंग तथा आंतरिक डिज़ाइन शामिल हैं, के मज़बूत डिज़ाइन बिल्डिंग की कीमत को चार चाँद लगा रहे हैं। बिल्डिंग के अंदरूनी हिस्से स्थानीय हस्तशिल्प, भित्ति चित्र और पर्यटन स्थलों को दर्शाते हैं।

 

 

खजुराहो हवाईअड्डा, मध्य प्रदेश

 

i) नए एटीसी टॉवर एवं तकनीकी ब्लॉक का निर्माण

श्रेणी श्रेणीIII (आईएमडी-II)
परियोजना लागत रुपये 18.26 करोड़
परियोजना की शुरूआत मई 2018
पूर्ण होने की संभावित तिथि दिसम्बर 2020

खजुराहो हवाई अड्डे में नया एटीसी टॉवर और तकनीकी ब्लॉक, गुरुग्राम के सलाहकारों, डिज़ाइन आईकॉन के परामर्श के अंतर्गत, निर्माणाधीन है। टॉवर की ऊंचाई लगभग 35 मीटर होगी और यह मौजूदा एटीसी टॉवर का स्थान ले लेगा, जो पुराना और आकार में बहुत छोटा है और जो हवाई अड्डे पर सम्मिलित की जाने वाली अपग्रेडिड सीएनएस/एटीएम इकाइयों को सेवाएँ प्रदान नहीं कर सकता है।

ii) एयरसाइड के बुनियादी ढांचे का विकास

हवाईअड्डे पर वर्तमान में चल रहे एयरसाइड कार्यों में रनवे स्ट्रिप के चौड़ीकरण और ग्रेडिंग, पैरिमीटर सड़क का निर्माण, स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम और ऑपरेशनल बाउंड्री वॉल शामिल हैं। इसके सितम्बर,2020 तक पूरा होने की संभावना है।

 

 

गया हवाईअड्डा

 

i) कंट्रोल टॉवर एवं तकनीकी ब्लॉक का निर्माण

श्रेणी श्रेणीIII (आईएमडी-II)
परियोजना लागत रुपये 17.71 करोड़
परियोजना की शुरूआत फ़रवरी 2016
पूर्ण होने की प्रस्तावित तिथि अगस्त 2020

मौजूदा कंट्रोल टॉवर बिल्डिंग मौजूदा एप्रन के बहुत करीब है और बेहद जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है। यह बिल्डिंग भीड़-भाड़ वाली है और इसमें एरिया कंट्रोल सेंटर को दो हिस्सों में विभाजित करने के लिए जगह की कमी है और यह और अधिक साधनों और कार्यालय कर्मियों को समायोजित करने के लिए बहुत छोटी है। मौजूदा टॉवर की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए एक नये एटीसी टॉवर का निर्माण किया जा रहा है।

ii) नए एप्रन का विस्तार

वर्तमान एप्रन में केवल 3 विमानों को खड़ा करने की क्षमता है। एयरलाइंस द्वारा अतिरिक्त पार्किंग स्टैंडों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए रुपये 12 करोड़ की लागत से दो अतिरिक्त स्टैंडों के निर्माण हेतु कदम उठाए गए हैं और यह कार्य अप्रैल,2021 तक पूरा होने की संभावना है।

 

 

पुदुचेरी हवाईअड्डा

 

i) एटीसी टॉवर-सह-तकनीकी ब्लॉक एवं कैट-VII के फायर स्टेशन का निर्माण

प्रस्तावित एटीसी टॉवर सह तकनीकी ब्लॉक, पांच मंजिला कंट्रोल टॉवर के साथ, एक तीन मंजिला स्ट्रक्चर है। कंट्रोल टॉवर का फ्लोर लेवल भू-स्तर से 18.25 मीटर ऊपर है।

क्षेत्रफल 920 वर्गमीटर
एटीसी श्रेणी कैट-IV, आईएमडी-II
परियोजना लागत रुपये 10.88 करोड़
परियोजना की शुरूआत फरवरी 2018
पूर्ण होने की प्रस्तावित तिथि मार्च 2020

 

 

होलोंगी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा, ईटानगर

 

अरुणाचल प्रदेश की राजधानी के लिए हवाई संपर्क के महत्व को देखते हुए, ईटानगर से 15 किमी दूर होलोंगी में एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे का निर्माण प्रस्तावित है। 667 एकड़ भूमि पर नियोजित हवाई अड्डा ए-320 प्रकार के विमान संचालन को संभालने में सक्षम होगा। ग्रीनफील्ड हवाईअड्डे का निर्माण चरणबद्ध रूप में किया जाएगा। प्रथम चरण 955 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर विकसित किया जाएगा जिसमें 2300x45 मी. के रनवे, ए-320 प्रकार के विमान के लिए 2 एप्रन, व्यस्ततम घंटों में 200 यात्रियों की क्षमता वाले आधुनिकतम टर्मिनल, एटीसी-सह-तकनीकी ब्लॉक, एक फायर स्टेशन, आइसोलेशन बे का निर्माण, डीवीओआर और आईएलएस का प्रतिष्ठापन शामिल है।

व्यस्ततम घंटों में 200 यात्रियों को हैंडल करने की क्षमता वाली नई घरेलू टर्मिनल बिल्डिंग का क्षेत्रफल 4100 वर्गमीटर होगा। बिल्डिंग का रूप सरलतम अवधारणाओं से शुरू होता है। बिल्डिंग को एक लम्बे-चौड़े एकल क्षेत्र के रूप में माना गया है, जिसके माध्यम से यात्री आसानी से सड़क से विमान तक जा सकते हैं। बिल्डिंग का आंतरिक भाग शांत, निर्जन स्थानों की अनुभूति कराता है जो यात्रियों को अपनी लम्बी यात्रा के तनाव से दूर, आराम करने के लिए एक स्थान प्रदान करता है। टर्मिनल का कांच का आवरण इस प्रकार से बना हुआ है जो कि हिमालयी तलहटी के मनोरम प्राकृतिक स्थल की पूरी श्रंखला को दर्शाता है। टर्मिनल बिल्डिंग ने एक जीवंत रूप प्राप्त कर लिया है क्योंकि इसका कांच का आवरण लैंडस्केप प्रतिमावली को दर्शाता है।

 

 

हीरासर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा, राजकोट

 

236 एकड़ में फैले मौजूदा राजकोट हवाई अड्डे पर ए-320 प्रकार के विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त 1842मीx45मी. के विस्तार वाला एकल रनवे 05/23 है। मौजूदा हवाई अड्डे के विस्तार की कोई संभावना नहीं है क्योंकि हवाई अड्डा रेलवे लाइन से घिरा हुआ है और इसके पूर्वी तरफ स्टेट हाइवे है तथा हवाई अड्डे के चारों ओर आवासीय विकास हो रखा है। इसलिए हीरासर में राजकोट के लिए एक नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निर्माण के लिए गुजरात सरकार को एक प्रस्ताव पुट-अप किया गया था।

हीरासर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे का विकास कार्य रनवे, एप्रन और संबद्ध आवश्यक परिचालन सुविधाओं, टर्मिनल बिल्डिंग, एटीसी टॉवर, फायर स्टेशन आदि के निर्माण सहित समग्र रूप से 1405 करोड़ रुपये की लागत से होगा। टर्मिनल बिल्डिंग का डिज़ाइन आरम्भिक स्तर पर है और टर्मिनल को सभी प्रकार की यात्री सुविधाओं से लैस करने की योजना तैयार की जा रही है।