भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (ए ए आई) का गठन संसद के एक अधिनियम द्वारा किया गया तथा यह तत्कालीन राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण तथा भारतीय अतंरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के विलय के माध्यम से 1 अप्रैल 1995 को अस्तित्व में आया। इस विलय से एक एकल संगठन अस्तित्व में आया जिसे देश में जमीन पर एवं वायु क्षेत्र में भी नागर विमानन अवसंरचना के सृजन, उन्नयन, अनुरक्षण एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के पास 134 प्रचालनात्मक​हवाई अड्डे हैं  जिनमें 26 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (3 सिविल एन्क्लेव सहित), 12 कस्टम हवाई अड्डे (4 सिविल एन्क्लेव सहित) और 96 घरेलू हवाई अड्डे (22 सिविल एन्क्लेव सहित) शामिल हैं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण 2.8 मिलियन वर्ग नाटिकल मील के वायु क्षेत्र में वायु दिक्चालन की सुविधाएं उपलब्ध कराता है। वर्ष 2023-24  के दौरान भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने अपने हवाईअड्डों से (संयुक्त उद्यम एवं पीपीपी हवाईअड्डों को छोडकर) 1053.96 हजार (अंतरराष्ट्रीय 103.75 एवं घरेलू 950.21) विमानों का संचालन किया,  130.67 मिलियन [अंतरराष्ट्रीय 15.09 मिलियन  और घरेलू 115.58] यात्रियों को हैंडल किया और 688.38 हजार मीट्रिक टन [अंतरराष्ट्रीय 338.85 और घरेलू 349.53] कार्गो को हैंडल किया।

1. या‍त्री सुविधाएं

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के मुख्य कार्यों में अन्य बातों के साथ यात्री टर्मिनलों का निर्माण, सुधार एवं प्रबंधन, कार्गो टर्मिनलों का विकास एवं प्रबंधन, रनवे, पैरलल टैक्सी वे, एप्रन आदि समेत एप्रन अवसंरचना का विकास एवं अनुरक्षण शामिल है। इसके प्रमुख कार्यों में अपने टर्मिनलों पर संचार, नेविगेशन एवं निगरानी का प्रावधान करना शामिल है जिसमें डी वी ओ आर / डी एम ई, आई एल एस, ए टी सी रडार, विजुअल एड्स आदि का प्रावधान, वायु ट्रैफिक सेवाओं का प्रावधान, यात्री सुविधाओं एवं संबद्ध सुविधाओं का प्रावधान शामिल है जिसके माध्यम से देश में एयरक्राफ्ट, यात्री एवं कार्गो का सुरक्षित एवं निरापद प्रचालन सुनिश्चित होता है।

2. वायु दिक्चालन सेवाएं

देशों एवं क्षेत्रीय सीमाओं के पार सुगम दिक्चालन के लिए वायु दिक्चालन अवसंरचना के आधुनिकीकरण के प्रति वैश्विक दृष्टिकोण की तर्ज पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण उपग्रह आधारित संचार दिक्चालन निगरानी एवं वायु यातायात प्रबंधन अपनाने के लिए अपनी योजनाओं के साथ अग्रसर है। अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन, अमेरिकी व्यापार एवं विकास एजेंसी, यूरोपीय संघ, एयर सर्विसेज आस्ट्रेलिया तथा फ्रेंच गवर्नमेंट कोऑपरेटिव प्रोजेक्ट्स एंड स्टडीज के साथ उनके अनुभव का लाभ उठाने के लिए अनेक सहयोग अनुबंध तथा ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अधिकाधिक कार्यपालक विमानपत्तनों एवं वायु दिक्चालन सेवाओं के समग्र निष्पादन में सुधार के लिए अपनाई जा रही नवीनतम प्रौद्योगिकी, आधुनिक पद्धतियों एवं प्रक्रियाओं से अवगत हो रहे हैं।

पुराने उपकरणों के प्रतिस्थापन के रूप में तथा हवा में विमानपत्तनों की सुरक्षा के मानकों में सुधार के लिए नई सुविधाओं के रूप में नवीनतम अत्याधुनिक उपकरणों को अपनाना एक सतत प्रक्रिया है। नई एवं परिष्कृत कार्यविधि का अंगीकरण नए उपकरण के आगमन के साथ-साथ होता है। इस दिशा में कुछ प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं – वायु क्षेत्र क्षमता में वृद्धि तथा हवा में भीड़भाड़ कम करने के लिए भारतीय वायु क्षेत्र में रिड्यूस्ड वर्टिकल सेपरेशन मिनिमा (आर वी एस एम) का प्रारंभ; इसरो के साथ संयुक्त रूप से जीपीएस एंड जीओ ऑगमेंटेड नेविगेशन (गगन) का कार्यान्वयन, जो प्रचालित होने पर विश्व में इस तरह के चार सिस्टमों में से एक होगा।

3. सुरक्षा

मौजुदा सुरक्षा परिवेश ने महत्‍वपूर्ण अधिष्‍ठापनों की सुरक्षा मजबूत करने की आवश्‍यकता पर बल दिया है। इस प्रकार न केवल किसी दुस्‍साहस को विफल करने के लिए अपितु समग्र रूप में हवाई यात्रा की सुरक्षा में यात्रा करने वाले लोगों का विश्‍वास, जो 9/11 की त्रासदी के बाद डिग गया था, बहाल करने के लिए भी विमानपत्‍तनों पर सुरक्षा सुदृढ़ करने की तत्‍काल आवश्‍यकता थी। इसे ध्‍यान में रखते हुए अनेक कदम उठाए गए जिसमें विमानपत्‍तनों की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ की तैनाती, संवेदनशील विमानपत्‍तनों पर सीसीटीवी निगरानी प्रणाली, नवीनतम एवं अत्याधुनिक एक्‍सरे बैगेज निरीक्षण प्रणाली, प्रीमियर सुरक्षा एवं निगरानी प्रणाली शामिल है। विमानपत्‍तनों पर महत्‍वपूर्ण अधिष्‍ठापनों में अक्‍सेस को नियंत्रित करने के लिए स्‍मार्ट कार्ड पर भी विचार किया जा रहा है ताकि संवेदनशील विमानपत्‍तनों पर सुरक्षा कार्मिकों के प्रयासों को संपूरित किया जा सके।

4. हवाई अड्डा सुविधाएं

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में, हवाईअड्डो की सुविधाओं की योजना के प्रति अपनाया गया बुनियादी दृष्टिकोण यह है कि हमारे प्रयास मांग से अधिक क्षमता सृजित करने पर केंद्रित हों। इस कार्यनीति को कार्यान्वित करने के लिए विभिन्न विमानपत्तनों पर रनवे, टैक्सी ट्रैक एवं एप्रन के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के लिए अनेक परियोजनाएं हाथ में ली गई हैं। सभी विमानपत्तनों पर एयर बस-320 / बोइंग 737-800 श्रेणी के हवाई जहाजों के प्रचालन में सहायता के लिए रनवे को 7500 फीट तक बढ़ाने का कार्य हाथ में लिया गया है।

5. एचआरडी प्रशिक्षण

प्रशिक्षित एवं अत्यधिक कुशल जनशक्ति का एक विशाल पूल भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की प्रमुख परिसंपत्तियों में से एक है। विकास एवं प्रौद्योगिकी में उन्नति तथा प्रचालन मानकों एवं कार्यविधियों में परिणामी परिष्करण, सुरक्षा एवं संरक्षा के नए मानक तथा प्रबंधन की तकनीकों में सुधार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के ज्ञान एवं कौशल को अपडेट करने के लिए निरंतर प्रशिक्षण का आह्वान करते हैं। इस प्रयोजनार्थ अपने इंजीनियरों, वायु ट्रैफिक नियंत्रकों, बचाव एवं अग्निशमन कार्मिकों आदि को अपने यहां प्रशिक्षण देने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अनेक प्रशिक्षण स्थापनाएं अर्थात दिल्ली में एनआईएएमएआर, इलाहाबाद में सी ए टी सी, दिल्ली एवं कोलकाता में अग्निशमन प्रशिक्षण केंद्र हैं। एनआईएएमएआर एवं सीएटीसी आईसीएओ ट्रेनर कार्यक्रम के सदस्य हैं जिसके अंतर्गत वे विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए केंद्रीय पूल से मानक प्रशिक्षण पैकेज (एसटीपी) साझा करते हैं। सीएटीसी एवं एनआईएएमएआर दोनों ने आईसीएओ ट्रेनर कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय पूल में अनेक एसटीपी का भी योगदान किया है। इन संस्थाओं द्वारा संचालित किए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम में विदेशी छात्र भी भाग ले रहे हैं।

6. आईटी कार्यान्वयन

सूचना प्रौद्योगिकी प्रचालनात्मक एवं प्रबंधकीय दक्षता, पारदर्शिता एवं कर्मचारियों की उत्पादकता की कुंजी है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने अपने कर्मचारियों में आईटी संस्कृ‍ति विकसित करने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया है तथा यह इस संगठन में दक्षता बढ़ाने का सबसे सशक्त साधन है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की वेबसाइट, जिसका नाम www.aai.aero है, एक लोकप्रिय वेबसाइट है जो घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के बारे में अनेक तरह की सूचनाएं प्रदान करती है। यह विशेष रूप से यात्रियों के हित की सूचनाओं के साथ-साथ सामान्यतया आम जनता के हित की सूचनाएं भी प्रदान करती है।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के कार्य इस प्रकार हैं:

हवाईअड्डा विकासक के रूप में-

  • अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू हवाईअड्डो तथा सिविल एन्कलेव की अभिकल्पना, विकास, प्रचालन एवं अनुरक्षण।
  • प्रचालन क्षेत्र अर्थात रनवे, एप्रन, टैक्सी वे आदि का विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण।
  • हवाईअड्डों के यात्री टर्मिनलों एवं अन्य सुविधाओं का निर्माण, सुधार एवं प्रबंधन।
  • कार्गो टर्मिनलों का विकास एवं प्रबंधन।(इसकी सहायक – भाविप्रा कार्गों लाजिस्टिक एवं सहायक सेवा कम्पनी लिमिटेड के द्वारा)
  • यात्री सुविधाओं एवं सूचना प्रणाली का प्रावधान सुनिश्चित करना।

वायु दिक्चालन सेवा प्रदाता के रूप मेः-

  • आईसीएओ द्वारा यथा स्वीकृत देश की भौगोलिक सीमाओं के बाद भारतीय वायु अंतरिक्ष का नियंत्रण एवं प्रबंधन।
  • उडानों की सुरक्षा एवं योग्यता सुनिश्चित करना।
  • भारतीय वायु क्षेत्र में संचार, दिक्चालन और निगरानी के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रावधान करना।