भूमिका और कार्य
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के सतर्कता प्रभाग का प्रमुख सीवीओ होता है तथा सतर्कता से संबंधित सभी मामलों में भाविप्रा के अध्यक्ष के सलाहकार के रूप में कार्य करता है। सीवीओ संस्थान एवं केंद्रीय सतर्कता आयोग के साथ-साथ केंद्रीय जांच ब्यूरो के बीच एक कड़ी भी प्रदान करता है।
सीवीओ, भाविप्रा प्रबंधन को सतर्कता जांच, निरीक्षण तथा संवीक्षा से प्राप्त टिप्पणियों के आधार पर संगठन के कामकाज में सुधार के लिए अपनाए जाने वाले विभिन्न उपायों पर भी परामर्श देता है।
सीवीओ द्वारा किया जाने वाले सतर्कता कार्य व्यापक है और इसमें उसके संगठन के कर्मचारियों द्वारा किए गए या किए जाने वाले भ्रष्ट आचरणों के बारे में खुफिया जानकारी एकत्र करना शामिल है; उन्हें बताए गए आरोपों की जांच करना या जांच करवाना; संबंधित अनुशासनात्मक प्राधिकारी को आगे विचार करने के लिए अन्वेषण रिपोर्ट संसाधित करना; आवश्यकतानुसार सुझावों के लिए मामले को आयोग को संदर्भित करना; अनुचित प्रथाओं एवं कदाचार आदि को रोकने के लिए कदम उठाना, इत्यादि। अतः, सीवीओ के कार्यों को व्यापक रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है, जो निम्नवत हैं: -

अपनी निवारक भूमिका में, ये सक्रिय रूप से दिन-प्रतिदिन के ऐसे मामलों के प्रति जागरूकता अभियान चलाकर संवेदनशीलता उत्पन्न करतें हैं, जिसमें कदाचार एवं भ्रष्टाचार की संभावना होती है। इन अभियानों में सतर्कता जागरूकता सप्ताह शामिल है जो एक वार्षिक कार्यक्रम है तथा भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न स्थानों पर पूरे वर्ष सतर्कता जागरूकता कार्यक्रम, जैसे कार्यशालाएं जिनमें व्याख्यान, सेमिनार आदि होता है, आयोजित की जाती हैं।

अपनी दंडात्मक भूमिका में, ये मामलों पर तेजी से कार्रवाई करके और अनुशासनात्मक कार्यवाही के विभिन्न चरणों की निगरानी करके, सतर्कता की दृष्टि से चूककर्ताओं को तुरंत अनुशासित करने में अनुशासनात्मक प्राधिकरण की सहायता करते हैं।

अपनी निगरानी और जासूसी भूमिका में, ये प्रणालीगत विफलता और भ्रष्टाचार या कदाचार के अस्तित्व का पता लगाने के लिए आकस्मिक और नियमित निरीक्षण और सीटीई प्रकार के निरीक्षण की योजना बनाते हैं और लागू करतें हैं। ये आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट एवं वार्षिक सम्पत्ति रिपोर्ट, आदि की संवीक्षा भी करते हैं।