भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण का लक्ष्य सामाजिक और पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी व्यावसायिक प्रथाओं सहित अच्छे निगमित प्रशासन को समेकित और मजबूत करना है, जो सामाजिक कल्याण के साथ वित्तीय लाभ को संतुलित करता है।

भाविप्रा इस बात को स्वीकार करता है कि उसके मुख्य व्यवसाय, अर्थात हवाई अड्डों का निर्माण और प्रचालन, के कुछ अपेक्षित और अप्रत्याशित परिणाम और प्रभाव हो सकते हैं। इसके कार्य की प्रकृति को देखते हुए इसका प्राथमिक प्रभाव हवाई अड्डों के आसपास के पर्यावरण और समुदायों पर पड़ता है। इसलिए सीएसआर के लिए हमारी प्रेरणा और दृष्टिकोण यही रही है कि समावेशी विकास का माहौल बनाते हुए हमारे हवाई अड्डों के आसपास वंचित समुदायों के लिए सशक्तिकरण के अवसर लाए।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (भाविप्रा) एक सामाजिक रूप से जिम्मेदार उद्यम रहा है, जो समाज की सेवा करने में अग्रणी रहा है और सामाजिक रूप से उपेक्षित वर्ग के लोगों, विशेषकर हवाई अड्डों के निकट रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हालाँकि हाल के वर्षों में, यह न केवल हवाई अड्डों के पास के क्षेत्रों तक सीमित रह गया है, बल्कि इसने हमारे देश के हर कोने तक अपनी पहुंच का विस्तार किया है। भाविप्रा निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व पर अपने व्यय को धीरे-धीरे बढ़ाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। भाविप्रा के सीएसआर कार्य के विषयगत/कार्यक्रम के केंद्र में निम्नलिखित शामिल हैं, लेकिन यह यहीं तक सीमित नहीं है:

  1. शिक्षा, जिसमें औपचारिक और अनौपचारिक शिक्षा तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण शामिल है जो सतत आय सृजन और आत्मनिर्भरता में योगदान देता है ।
  2. स्वास्थ्य को जीवन की बेहतर गुणवत्ता का अभिन्न अंग बनाना, जिसमें महिलाओं और लड़कियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  3. एकीकृत सामुदायिक विकास जो सरकार के वैधानिक पुनर्वास और पुनरूद्धार कार्यक्रमों में अंतराल को भरता है और यह सुनिश्चित करता है कि समुदायों के जीवन की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़े ।
  4. आपदा प्रबंधन में तैयारी, क्षमता निर्माण के साथ-साथ आपदाओं की स्थिति में भाविप्रा की मुख्य योग्यता का लाभ उठाते हुए आपातकालीन प्रतिक्रिया शामिल है।
  5. पर्यावरण संरक्षण ।

लोक उद्यम विभाग (डीपीई) ने वित्त वर्ष 2020-21 में भाविप्रा के लिए सीएसआर परियोजनाओं के विषय के रूप में “स्वास्थ्य देखभाल और पोषण” को सौंपा है। वित्त वर्ष 2019-20 में, डीपीई द्वारा सौंपे गए विषय शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और पोषण थे, जिसमें भाविप्रा ने 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विभिन्न सीएसआर परियोजनाओं पर लगभग 120 करोड़ रुपये खर्च किए।

भाविप्रा अपनी सीएसआर गतिविधियों का विस्तार नीति आयोग द्वारा चिन्हित उन आंकाक्षी जिलों तक कर रहा है, जो अत्यधिक अविकसित हैं। यद्यपि यह लगभग सभी क्षेत्रों में कार्यक्रम चलाता है, लेकिन इसका मुख्य केंद्र स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और पोषण पर रहा है। डीपीई द्वारा भाविप्रा को विभिन्न भारतीय राज्यों में 16 आंकाक्षी जिले आवंटित किए गए हैं, और भाविप्रा ने इन आंकाक्षी जिलों में विकास की दिशा में अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के सहयोग से रांची में इसकी एक सामुदायिक विकास परियोजना चल रही है। हाल ही में, भाविप्रा ने बिहार के औरंगाबाद जिला प्रशासन के साथ 55 आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी) के अद्यतनीकरण के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इन दो परियोजनाओं के अतिरिक्त, भाविप्रा मामित (मिजोरम) और चंदेल (मणिपुर) के सरकारी स्कूलों में शौचालयों का निर्माण कर रहा है, जो दोनों आंकाक्षी जिले भी हैं। सीएसआर बजट में से भाविप्रा  60% राशि लोक उद्यम विभाग (डीपीई) द्वारा निर्धारित थीम पर खर्च करना सुनिश्चित करता है।

डीपीई द्वारा भाविप्रा को आवंटित आंकाक्षी जिलों की सूची