सोलापुर भारत के महाराष्ट्र के दक्षिण-पश्चिमी कोने में स्थित एक शहर है। वर्ष 2014 की जनगणना के अनुसार सोलापुर शहर की जनसंख्या 12 लाख से अधिक थी। यह सोलापुर जिले के मुख्यालय के रूप में भी कार्य करता है। जैसा कि महाराष्ट्र के अधिकांश शहरों में होता है, सोलापुर में बोली जाने वाली मुख्य भाषा मराठी है। सोलापुर आंध्र प्रदेश और कर्नाटक राज्य की सीमा पर पंढरपुर, अक्कलकोट और गंगापुर जैसे पवित्र स्थानों के पास स्थित है।
सोलापुर जिले पर विभिन्न राजवंशों जैसे आंध्रभृत्य, चालुक्य, राष्ट्रकूट, यादव और बहमनियों का शासन था। माना जाता है कि 'सोलापुर' नाम की उत्पत्ति दो शब्दों अर्थात् 'सोला' जिसका अर्थ सोलह और 'पुर' जिसका अर्थ गांव है, से हुई है। सोलापुर का वर्तमान शहर सोलह गाँवों अर्थात् आदिलपुर, अहमदपुर, चापलदेव, फतेहपुर, जामदारवाड़ी, कालाजापुर, खादरपुर, खंडेरवकीवाड़ी, मुहम्मदपुर, राणापुर, संदलपुर, शेखपुर, सोलापुर, सोनालगी, सोनापुर और वैदकवाड़ी में फैला हुआ माना जाता था। किन्तु हाल ही के शोध कार्य से पता चलता है कि सोलापुर नाम सोलह गांवों के समूह से नहीं लिया गया है। कल्याणी के कलचुरिस्तियों के समय के शिवयोगी श्री सिद्धेश्वर के शिलालेखों से यह स्पष्ट हुआ है कि इस शहर को 'सोनालगे' कहा जाता था, जिसका उच्चारण 'सोनालगी' के रूप में किया जाने लगा। यादवों के समय तक भी इस शहर को सोनालगी के नाम से जाना जाता था। यादवों के पतन के बाद शक 1238 दिनांकित, मोहोल में कामती में पाए गए एक संस्कृत शिलालेख से पता चलता है कि शहर को सोनालीपुर के नाम से जाना जाता था। सोलापुर किले में पाए गए एक शिलालेख से पता चलता है कि शहर को सोनालपुर कहा जाता था, जबकि किले के कुएं पर लगे एक अन्य शिलालेख से पता चलता है कि इसे संदलपुर के नाम से जाना जाता था। मुस्लिम काल के दौरान, शहर को संदलपुर के नाम से जाना जाता था। इसलिए सबसे अधिक संभावना यह है कि समय के दौरान सोनालपुर नाम से 'ना' हटाकर सोलापुर नाम विकसित किया गया था। इसके बाद ब्रिटिश शासकों ने सोलापुर को शोलापुर कहा और इसलिए जिले का नाम यह पड़ा। वर्तमान सोलापुर जिला पहले अहमदनगर, पुणे और सतारा जिलों का हिस्सा था। सन् 1838 में यह अहमदनगर का उप-जिला बन गया। इसमें बार्शी, मोहोल, माधा, करमाला, इंदी, हिप्पार्गी और मुद्देबिहल उप प्रभाग शामिल हैं। सन् 1864 में इस उप-जिले को समाप्त कर दिया गया था। सन् 1871 में इस जिले में उप-प्रभागों यथा सोलापुर, बर्शी, मोहोल, माधा,करमाला और सतारा जिले के दो उप- प्रभाग अर्थात पंढरपुर, सांगोला को शामिल करके इसमें सुधार किया गया था। इसके अलावा सन् 1875 में मालशीरस अनुमंडल को भी इसमें जोड़ा गया। सन् 1956 में राज्य के पुनर्गठन के बाद सोलापुर को मुंबई राज्य में शामिल किया गया और 1960 में यह महाराष्ट्र राज्य का एक पूर्ण विकसित जिला बन गया।
भारत के इतिहास में सोलापुर का महत्व इस मायने में अद्वितीय है कि इस जिले ने स्वतंत्रता से पहले ही स्वतंत्रता का आनंद लिया। सोलापुर के नागरिकों ने 9 से 11 मई 1930 तक तीन दिनों के लिए आजादी का आनंद लिया। इसका संक्षिप्त इतिहास इस प्रकार है कि मई 1930 में महात्मा गांधी की गिरफ्तारी के बाद पूरे भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध और प्रदर्शन हुए। सोलापुर में भी बड़े पैमाने पर रैलियां और विरोध प्रदर्शन किए गए। पुलिस फायरिंग में कई नागरिकों ने अपनी जानें गंवाई। इससे गुस्साई भीड़ ने पुलिस थानों पर हमला बोल दिया। डर के मारे पुलिस और अन्य अधिकारी सोलापुर से बाहर भाग गए। इस दौरान कानून एवं व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कांग्रेस पार्टी के नेताओं के कंधों पर थी। तत्कालीन नगर कांग्रेस अध्यक्ष श्री. रामकृष्ण जाजू ने अपने अन्य कांग्रेसियों के साथ 9 से 11 मई 1930 तक तीन दिनों की अवधि के लिए कानून और व्यवस्था को बनाए रखा। दूसरे, सोलापुर नगरपालिका परिषद भारत की पहली नगरपालिका परिषद थी जिसने 1930 में सोलापुर के नगरपालिका परिषद भवन (अब नगर निगम) पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। सोलापुर का संक्षिप्त इतिहास इस प्रकार का है। महात्मा गांधी से दांडी मार्च की भावना को लेते हुए, सोलापुर के स्वतंत्रता सेनानियों ने सोलापुर नगरपालिका परिषद पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का फैसला किया। तदनुसार, पुणे के वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी श्री अन्नासाहेब भोपाटकर ने 6 अप्रैल 1930 को नगर परिषद पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। यह पूरे देश में इस तरह की पहली और अनोखी घटना थी।
ब्रिटिश शासकों ने गुस्से में आकर सोलापुर में मार्शल लॉ घोषित कर दिया और कई नेताओं और निर्दोष नागरिकों को झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया। स्वतंत्रता सेनानी श्री मल्लप्पा धनशेट्टी, श्री कुर्बान हुसैन, श्री जगन्नाथ शिंदे व श्री किसन शारदा को मंगालवार थाने के दो पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। निचली अदालत ने इन स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी की सजा सुनाई थी। उच्च न्यायालय ने भी इसी फैसले की पुष्टि की और इन चारों स्वतंत्रता सेनानियों को 12 जनवरी 1931 को फांसी पर लटका दिया गया। इन स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान के रूप में, इन स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों को शहर के बीचों-बीच स्थापित किया गया और इस स्थान को हुतात्मा चौक का नाम दिया गया है।
सोलापुर 17.68°N 75.92°E पर स्थित है। इसकी औसत ऊंचाई 458 मीटर (1502 फीट) है। यह उत्तर में अहमदनगर जिले; उत्तर और उत्तर पूर्व में उस्मानाबाद जिले, दक्षिण-पूर्व में गुलबर्गा जिले से और कर्नाटक राज्य के दक्षिण में बीजापुर जिले, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम में सांगली जिले; पश्चिम में सतारा जिले और उत्तर पश्चिम में पुणे जिले से घिरा है। यह सड़क और रेल मार्ग द्वारा महाराष्ट्र राज्य की राजधानी मुंबई से 410 किमी (250 मील) की दूरी पर स्थित है। सोलापुर पुणे से 245 किमी (152 मील) और हैदराबाद से 305 किमी (190 मील) की दूरी पर है। सोलापुर दक्कन के पठार पर स्थित है। ‘‘कोपेन’’ जलवायु वर्गीकरण के अनुसार सोलापुर शुष्क (शुष्क और अर्धशुष्क) जलवायु की श्रेणी में आता है। यह शहर तीन अलग-अलग मौसमों का अनुभव करता है: गर्मी, वर्षा ऋतु और सर्दी। ठेठ गर्मी के महीने मार्च से मई तक होते हैं, जब अधिकतम तापमान 30 से 40 डिग्री सेल्सियस (86 से 104 डिग्री फारेनहाइट) तक होता है। सोलापुर में सबसे गर्म महीने अप्रैल और मई हैं। विशिष्ट(typical) अधिकतम तापमान 40°से. (104°फा.) या इससे अधिक होता है। मई 1988 में अब तक का उच्चतम तापमान 46.0°से. (114.8°फा.) रिकॉर्ड किया गया है। हालांकि गर्मी मई या यहां तक कि जून के मध्य तक समाप्त नहीं होती है, शहर में अक्सर मई में स्थानीय रूप से विकसित भारी बारिश होती है (हालांकि आर्द्रता अधिक रहती है)। हलकी बारिश के साथ मानसून जून से सितंबर के अंत तक रहता है। सोलापुर शहर में प्रति वर्ष 545 मिमी (21.5 इंच) की औसत वर्षा होती है। सर्दी नवंबर में शुरू होती है और फरवरी के अंत तक रहती है जिसमें तापमान कभी-कभी 10 डिग्री सेल्सियस (50 डिग्री फारेनहाइट) से नीचे गिर जाता है। सोलापुर, शहर के पूर्व में लगभग 100 किमी (62 मील) किलारी, लातूर जिले के आसपास भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र के बहुत करीब स्थित है।
सोलापुर बहु-भाषाई और बहु-सांस्कृतिक विशेषताओं वाला शहर है। सोलापुर में तेलुगु, कन्नड़, मराठी, हिंदी और उर्दू भाषा बोलने वाले लोगों का मिश्रण है।
सोलापुर में शिवाजी विश्वविद्यालय (कोल्हापुर) के केंद्र में कॉलेज और संस्थान तीन विभागों पॉलिमर केमिस्ट्री, एप्लाइड फिजिक्स / इलेक्ट्रॉनिक्स और जियोलॉजी के साथ मास्टर कोर्स और इन क्षेत्रों में एम.फिल, पीएचडी शोध कार्य कर रहे थे। केंद्र, डॉ. वी. एम. सरकारी मेडिकल कॉलेज के पुराने परिसर में स्थित था जिसे बाद में पुलिस गोलीबार मैदान में स्थानांतरित कर दिया गया था। सोलापुर जिले के छात्रों की सहायता के लिए केंद्र को विश्वविद्यालय में बदल दिया गया और औपचारिक रूप से 3 अगस्त 2004 को इसका उद्घाटन किया गया।
सोलापुर में 14 इंजीनियरिंग, 2 मेडिकल कॉलेज, 1 डेंटल कॉलेज और 1 आर्किटेक्चर कॉलेज है; यहां पर शहर की सीमा में 40 अन्य कॉलेज भी हैं।
सोलापुर में एक विज्ञान केंद्र है, जो एक विज्ञान संग्रहालय है और यह मुंबई में वर्ली में स्थापित नेहरू विज्ञान केंद्र और नागपुर के रमन विज्ञान केंद्र के बाद राज्य में तीसरे स्थान पर आता है। विज्ञान केंद्र पुणे-सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग के बगल में सोलापुर विश्वविद्यालय के पास के गांव, हीराज रोड में स्थित है। यह केंद्र जन-जन तक विज्ञान के प्रचार-प्रसार के सिद्धांत के साथ काम करता है। टेलीस्कोप के माध्यम से रात्रि आकाश को देखना केंद्र के कई कार्यक्रमों में से एक है।
पंढरपुर भगवान विठ्ठल और श्री रुक्मणि देवी [74], जिन्हें प्रमुख रूप से वारकरी समुदाय में पूजा जाता है, को समर्पित एक पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। यह महाराष्ट्र राज्य के कुलदेवता में से भी एक है। यह सोलापुर जिला मुख्यालय से सड़क मार्ग द्वारा 72 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां का एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल सिद्धेश्वर मंदिर है, जो 16वीं शताब्दी में निर्मित सिद्धेश्वर (सिद्धरामेश्वर) का निवास स्थान है। यह सालाना 3.5 मिलियन तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है। सोलापुर 1893 में बने मार्कंडेय मंदिर, 1970 में बने वेंकटेश्वर मंदिर, 19वीं सदी में बने रूप भवानी मंदिर और श्री शंकर मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है। सोलापुर में शहर के बीच में एक भूमि आधारित किला अक्कालकोट है जो 19वीं सदी के संत श्री स्वामी समर्थ महाराज का घर था, जिन्हें उनके भक्त भगवान दत्तात्रेय का अवतार मानते हैं। [2] ब्रिटिश राज के दौरान अक्कालकोट राज्य शाही भोंसले राजवंश द्वारा शासित एक रियासत थी।
सोलापुर में इंदिरा गांधी स्टेडियम, जिसे पहले पार्क मैदान के नाम से जाना जाता था, रणजी ट्रॉफी मैचों की मेजबानी करता है और यह महाराष्ट्र क्रिकेट टीम का घरेलू स्थल है। [76]
सोलापुर अपने क्षेत्र में कपड़ा उद्योगों से अपशिष्ट उत्पादों के रूप में उत्पादित अपशिष्ट रसायनों के कारण महाराष्ट्र के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है। शहर में कई वाहन डीजल ईंधन का उपयोग करते हैं, यह शहर के उपनगर में चीनी कारखानों और भारी कपड़ा उद्योगों द्वारा उत्सर्जित जबरदस्त धुंध(smog) भी उत्पन्न करता है। वायु प्रदूषण और इसके पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) द्वारा विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। शहर में पेड़ लगाकर और विभिन्न पर्यावरणीय अनुकूल लोगों की मदद से हरियाली विकसित करके गो-ग्रीन योजना शुरू की गई है।
रेल
सोलापुर रेलवे स्टेशन शहर के भीतर मुख्य रेलवे हब है। सोलापुर रेलवे डिवीजन दक्षिण भारत को पश्चिमी और उत्तर पश्चिमी भारत से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण डिवीजन है। अहमदाबाद, जयपुर, नई दिल्ली, मुंबई, पुणे आदि से ट्रेनें सोलापुर के रास्ते दक्षिणी राज्यों (तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल) के लिए चलती हैं।
सोलापुर बंगलौर एक्सप्रेस, सोलापुर नागपुर, सोलापुर पुणे हुतात्मा एक्सप्रेस, सोलापुर मुंबई, सोलापुर जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस और सोलापुर गोवा एक्सप्रेस द्वारा यहां प्रतिदिन सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। होतगी जंक्शन और कुर्दुवाड़ी जंक्शन सोलापुर जिले में मौजूद दो जंक्शन रेलवे स्टेशन हैं।
सड़क
NH9, सोलापुर के बाहरी इलाके में पुणे-मछलीपट्टनम राजमार्ग ।
सोलापुर महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों के साथ-साथ आस-पास के राज्य की राजधानी हैदराबाद और कर्नाटक के महत्वपूर्ण शहरों से चार राष्ट्रीय राजमार्गों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है - एनएच 9 हाइवे हैदराबाद के जरिये पुणे को विजयवाड़ा से जोड़ता है, एनएच -13 सोलापुर को मैंगलोर, कर्नाटक से जोड़ता है और NH-211 सोलापुर को धुले से जोड़ता है। रत्नागिरी-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग NH-204 शहर से होकर गुजरता है व सोलापुर को महाराष्ट्र के अन्य महत्वपूर्ण शहरों जैसे नागपुर, सांगली, कोल्हापुर और नांदेड़ से जोड़ता है। हाल ही में स्वीकृत राष्ट्रीय राजमार्ग हैं - (सोलापुर-कालबुर्गी) और रत्नागिरी-सोलापुर-यवतमाल-नांदेड़-नागपुर। (सोलापुर-बीजापुर) एनएच-13 में सड़क खंड को सुधार कर चार लेन का बनाने का प्रस्ताव है। सोलापुर से औरंगाबाद की यात्रा में लगने वाले समय और लागत को कम करने के लिए सोलापुर-औरंगाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग को भी चार लेन का बनाने का प्रस्ताव है।
सोलापुर हवाईअड्डा महाराष्ट्र के सोलापुर जिले का घरेलू हवाईअड्डा है। यह भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा संचालित है और इसका IATA कोड SSE तथा ICAO कोड VASL है। यह हवाईअड्डा केवल घरेलू यातायात का संचालन करता है। इस हवाईअड्डे से कोई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन संचालित नहीं होती है। अंतरराष्ट्रीय यात्री मुंबई हवाई अड्डे या पुणे हवाईअड्डे या बंगलुरू हवाईअड्डे का विकल्प चुन सकते हैं।
सोलापुर हवाईअड्डे की अवस्थिति - सोलापुर हवाईअड्डा महाराष्ट्र राज्य के सोलापुर शहर से 9 किमी की दूरी पर स्थित है। इसके भौगोलिक निर्देशांक देशांतर: 75° 93' 47" E और अक्षांश: 17° 62' 78" N हैं। इस हवाईअड्डे के रनवे की लंबाई 2097m/6878.16ft है और ARP ऊंचाई 482.92m/1584ft है।




The following items that are banned for carriage on person/hand baggage on board flights operating from civil airports in India; and Indian Registered aircrafts from foreign airports :
Personal Items
Sharp Objects
Sporting Goods
Guns and Firearms
Tools
Martial Arts / Self Defense Items
Explosive Materials
Flammable items
Disabling Chemicals and other Dangerous Items
Note : The above mentioned are only indicative lists of items. Commonsense, however, shall prevail in assessing whether an object can be used as a weapon for committing any act of unlawful interference with civil aviation operations.
Security related information
For Lost and found Baggage contact Duty Terminal Manager.
| Airport Name | Sholapur Airport |
| City Name | Sholapur |
| State | Maharashtra |
| Distance and Direction from the City | 10 Kms. |
| Address | Airport-in-Charge Airports Authority of India Sholapur Airport Sholapur (Maharashtra) |
| Telephone | - |
| Fax | - |
| - |
| Address | Regional Executive Director Western Region Airports Authority of India Porta Cabins, New Airport Colony Opposite Hanuman Road Vile Parle East Mumbai-400099 |
| Telephone | 91-22-28300606 |
| Fax | 91-22-28300606 |
| redwr |
| Code No. | 3 |
| Code Letter | C |
| Land Area | 365 Acres |
| Elevation | 1578 ft. |
| Arrival | Departure |
| 25 | 25 |
| Orientation | Dimension | Bearing Strength of Pavement - LCN/PCN |
| 15/33 | 4300 ft X 150 ft | LCN-10 |
| Parking Apron | |
| Dimensions | Capacity |
| 200 ft x 150 ft | One F-27 |
| Navigation Aids | |
| NDB | Not Available |
| Not Available |

