उदयपुर का सिटी पैलेस जिसके निर्माण की नीवं खुद महाराणा उदयसिंह द्वितीय ने रखी थी आज सिटी पैलेस भारत और राजस्थान के सबसे बड़े महलों में से एक है और पर्यटकों द्वारा सबसे ज्यादा देखे जाने वाले महलों में से भी एक है। हिन्दू और राजपूत वास्तुशैली में निर्मित उदयपुर का सिटी पैलेस भारत के सबसे सुंदर महलों में से एक है। सिटी पैलेस के निर्माण में मुख्य रूप से संगमरमर और ग्रेनाइट का उपयोग किया गया है। महल ...और अधिक पढें।
उदयपुर का सिटी पैलेस जिसके निर्माण की नीवं खुद महाराणा उदयसिंह द्वितीय ने रखी थी आज सिटी पैलेस भारत और राजस्थान के सबसे बड़े महलों में से एक है और पर्यटकों द्वारा सबसे ज्यादा देखे जाने वाले महलों में से भी एक है। हिन्दू और राजपूत वास्तुशैली में निर्मित उदयपुर का सिटी पैलेस भारत के सबसे सुंदर महलों में से एक है। सिटी पैलेस के निर्माण में मुख्य रूप से संगमरमर और ग्रेनाइट का उपयोग किया गया है। महल के अंदर निर्मित कक्षों में काँच के टुकड़ो का बहुत सुंदर तरीके से उपयोग किया गया है।
फतेह सागर झील उदयपुर की एक कृत्रिम झील है जो 1888 में महाराणा फतेह सिंह द्वारा एक बाढ़ से जाने के बाद निर्मित है। यह उदयपुर शहर की चार झीलों में से एक है जिसके चारों ओर नीला पानी और हरीयाली है जिस कारण इसे 'दूसरा कश्मीर' का उपनाम दिया गया है। उदयपुर की फतेह सागर झील प्रमुख आकर्षणों में से एक है। झील के बीच में तीन छोटे द्वीप हैं। नेहरू पार्क सभी द्वीपों में सबसे बड़ा है यह एक लोकप्रिय उद्यान है...और अधिक पढें।
फतेह सागर झील उदयपुर की एक कृत्रिम झील है जो 1888 में महाराणा फतेह सिंह द्वारा एक बाढ़ से जाने के बाद निर्मित है। यह उदयपुर शहर की चार झीलों में से एक है जिसके चारों ओर नीला पानी और हरीयाली है जिस कारण इसे 'दूसरा कश्मीर' का उपनाम दिया गया है। उदयपुर की फतेह सागर झील प्रमुख आकर्षणों में से एक है। झील के बीच में तीन छोटे द्वीप हैं। नेहरू पार्क सभी द्वीपों में सबसे बड़ा है यह एक लोकप्रिय उद्यान है जिसमें एक रेस्तरां और चिड़ियाघर है। नेहरू पार्क मोटर नावों की मदद से पहुँचा जा सकता है। राम प्रताप महल, शाही परिवारों का आवासीय स्थान भी फतेह सागर के तट पर स्थित है। फतेह सागर वाटर कैनाल से पिचोला झील और रंग सागर झील से जुड़ा हुआ है। अपने महान ऐतिहासिक महत्व और खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों के कारण इस जगह को पूरी दुनिया से पर्यटक देखने आते है।
शिल्पग्राम, जिसे हस्तशिल्प गांव के रूप में भी जाना जाता है, उदयपुर से लगभग 3 किमी दूर है। यह परंपरागत शैली में बनाई गई 26 झोपड़ियां का एक छोटा सा पुरवा है। ये झोपड़ियां हर रोज इस्तेमाल के घरेलू सामान के साथ सुसज्जित हैं। सब के बीच, पांच झोपड़ियां मेवाड़ के बुनकर समुदाय का प्रतीक हैं। यह एक तरह का नृवंशविज्ञान संग्रहालय है, जो पश्चिमी क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी जनसंख्या की जीवन शैली दर्शाता ह...और अधिक पढें।
शिल्पग्राम, जिसे हस्तशिल्प गांव के रूप में भी जाना जाता है, उदयपुर से लगभग 3 किमी दूर है। यह परंपरागत शैली में बनाई गई 26 झोपड़ियां का एक छोटा सा पुरवा है। ये झोपड़ियां हर रोज इस्तेमाल के घरेलू सामान के साथ सुसज्जित हैं। सब के बीच, पांच झोपड़ियां मेवाड़ के बुनकर समुदाय का प्रतीक हैं। यह एक तरह का नृवंशविज्ञान संग्रहालय है, जो पश्चिमी क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी जनसंख्या की जीवन शैली दर्शाता है। हर साल, गांव कई थियेटर के त्यौहारों की मेजबानी करता है जहां भारत के विभिन्न राज्यों से लोग आते हैं और भाग लेते हैं। ग्रामीण कला और शिल्प परिसर यहाँ 70 एकड़ जमीन के एक बड़े क्षेत्र में फैला अखाड़ा है। कलाकार और कारीगर शिल्प दर्शन में अपने काम को प्रदर्शित करते हैं।
राजसमंद जिले में स्थित नाथद्वारा के आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक रूप से बहुत समृद्ध है। यह शहर अरावली पर्वतमाला के पास में स्थित है और बनास नदी के किनारे पर बसा हुआ है। नाथद्वारा, उदयपुर से मात्र 45 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। नाथद्वारा में स्थित भगवान श्रीनाथजी के मंदिर की वजह से यह शहर भारत और दुनिया के प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटक स्थल के रूप में जाना जाता है। नाथद्वारा में स्थापित भगवान श्...और अधिक पढें।
राजसमंद जिले में स्थित नाथद्वारा के आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक रूप से बहुत समृद्ध है। यह शहर अरावली पर्वतमाला के पास में स्थित है और बनास नदी के किनारे पर बसा हुआ है। नाथद्वारा, उदयपुर से मात्र 45 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। नाथद्वारा में स्थित भगवान श्रीनाथजी के मंदिर की वजह से यह शहर भारत और दुनिया के प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटक स्थल के रूप में जाना जाता है। नाथद्वारा में स्थापित भगवान श्रीनाथजी के विग्रह को मूलरूप से भगवान कृष्ण का ही स्वरुप माना जाता है।
यह किला राजस्थान के राजसमन्द जिले में स्थित है। इस दुर्ग का निर्माण महाराणा कुम्भा ने सन 13 मई 1459 वार शनिवार को कराया था। इस किले को 'अजयगढ' कहा जाता था क्योंकि इस किले पर विजय प्राप्त करना दुष्कर कार्य था। इसके चारों ओर एक बडी दीवार बनी हुई है जो चीन की दीवार के बाद विश्व कि दूसरी सबसे बडी दीवार है। इस किले की दीवारे लगभग ३६ किमी लम्बी है और यह कि...और अधिक पढें।
यह किला राजस्थान के राजसमन्द जिले में स्थित है। इस दुर्ग का निर्माण महाराणा कुम्भा ने सन 13 मई 1459 वार शनिवार को कराया था। इस किले को 'अजयगढ' कहा जाता था क्योंकि इस किले पर विजय प्राप्त करना दुष्कर कार्य था। इसके चारों ओर एक बडी दीवार बनी हुई है जो चीन की दीवार के बाद विश्व कि दूसरी सबसे बडी दीवार है। इस किले की दीवारे लगभग ३६ किमी लम्बी है और यह किला किला यूनेस्को की सूची में सम्मिलित है। कुम्भलगढ किले को मेवाड की आँख कहते है यह दुर्ग कई घाटियों व पहाड़ियों को मिला कर बनाया गया है जिससे यह प्राकृतिक सुरक्षात्मक आधार पाकर अजय रहा।
उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण किलों में से एक चित्तौड़गढ़ का किला राजपूतों के साहस, शौर्य, त्याग, बलिदान और बड़प्पन का प्रतीक है। चित्तौड़गढ़ का यह किला राजपूत शासकों की वीरता, उनकी महिमा एवं शक्तिशाली महिलाओं के अद्धितीय और अदम्य साहस की कई कहानियों को प्रदर्शित करता है।राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में बेराच नदी के किनारे स्थित चित्तौड़गढ़ के किले को न सिर्फ राजस्थान का गौरव माना जाता है, बल्क...और अधिक पढें।
उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण किलों में से एक चित्तौड़गढ़ का किला राजपूतों के साहस, शौर्य, त्याग, बलिदान और बड़प्पन का प्रतीक है। चित्तौड़गढ़ का यह किला राजपूत शासकों की वीरता, उनकी महिमा एवं शक्तिशाली महिलाओं के अद्धितीय और अदम्य साहस की कई कहानियों को प्रदर्शित करता है।राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में बेराच नदी के किनारे स्थित चित्तौड़गढ़ के किले को न सिर्फ राजस्थान का गौरव माना जाता है, बल्कि यह भारत के सबसे विशालकाय किलों में से भी एक है, जिसका निर्माण 7वीं शताब्दी में मौर्य शासकों द्धारा किया गया था।करीब 700 एकड़ की जमीन में फैला यह विशाल किला अपनी भव्यता, आर्कषण और सौंदर्य की वजह से साल 2013 में यूनेस्को द्धारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है।
राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित अरावली की पहाड़ियों की सबसे ऊँची चोटी पर बसे माउंट आबू की भौगोलिक स्थित और वातावरण राजस्थान के अन्य शहरों से भिन्न व मनोरम है। माउंट आबू हिन्दू और जैन धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल है। यहां का ऐतिहासिक मंदिर और प्राकृतिक खूबसूरती सैलानियों को अपनी ओर खींचती है। माउंट आबू एक प्रसिद्द हिल स्टेशन है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आरामदा...और अधिक पढें।
राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित अरावली की पहाड़ियों की सबसे ऊँची चोटी पर बसे माउंट आबू की भौगोलिक स्थित और वातावरण राजस्थान के अन्य शहरों से भिन्न व मनोरम है। माउंट आबू हिन्दू और जैन धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल है। यहां का ऐतिहासिक मंदिर और प्राकृतिक खूबसूरती सैलानियों को अपनी ओर खींचती है। माउंट आबू एक प्रसिद्द हिल स्टेशन है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आरामदायक जलवायु, हरी भरी पहाड़ियों, निर्मल झीलों, वास्तुशिल्पीय दृष्टि से सुंदर मंदिरों और अनेक धार्मिक स्थानों के लिए प्रसिद्द है। यह स्थान जैनियों के प्रसिद्द तीर्थ स्थानों में से एक है। यह हिल स्टेशन अरावली पर्वत की सबसे ऊँची चोटी पर 1220 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। माउंट आबू अपने शानदार इतिहास, प्राचीन पुरातात्विक स्थलों और अद्भुत मौसम के कारण राजस्थान के पर्यटन के आकर्षणों में सबसे बड़ा है। अधिकांशतः गर्मियों में और मानसून के दौरान यहाँ प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक और भक्त आते हैं। पिछले दशकों में यह हिल स्टेशन गर्मियों और हनीमून के लिए एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में उभरा है। माउंट आबू से निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर यहाँ से १८५ किलोमीटर दूर है। उदयपुर से माउंट आबू पहुँचने के लिए बस या टैक्सी की सेवाएँ ली जा सकती हैं।
रणकपुर राजस्थान के देसूरी तहसील के निकट पाली ज़िले के सादडी में स्थित है। यह उदयपुर से 96 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है| रणकपुर जोधपुर और उदयपुर के बीच में अरावली पर्वत की घाटियों में स्थित है। यह स्थान मन्दिरों के लिए प्रसिद्ध है, जो उत्तरी भारत के श्वेताम्बर जैन मन्दिरों में अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। यह जगह बहुत ही मनोरम बन जाती है|
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