किशनगढ़ हवाईअडडा / Kishangarh Airport

राजस्थान के ऐतिहासिक शहर अजमेर के किशनगढ़ में एक छोटी सी हवाई पट्टी थी। इसका इस्तेमाल कभी-कभी राज्य सरकार, आगंतुकों और व्यापारियों द्वारा चार्टर विमानों/ हेलीकॉप्टरों के संचालन के लिए किया जाता था। इस स्थान पर अपार संभावनाएं जैसे-एशिया का सबसे बड़ा मार्बल का केंद्र, विश्व प्रसिद्ध अजमेर शरीफ दरगाह, पुष्कर तीर्थ, जैन मंदिर, किशनगढ़ कला शैली, गुलाब के फूलों और हीना की खेती, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय, मेयो कॉलेज, डम्पिंग यार्ड, खोड़ा गणेश मंदिर, गुंडोलाव झील, फूल महल पैलेस, नवग्रह मंदिर तथा और भी बहुत स्थान है। यह स्‍थान पर्यटकों, मार्बल व्यवसायियों, कलाकारों और शिक्षाविदों के लिए नियमित रूप से आवागमन का स्थान है। इसलिए जनता द्वारा यहां एक पूर्ण विकसित हवाईअड्डे की मांग की गई और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को पूर्ण करने वाले एक आधुनिक, स्‍व-स्‍थायी, कलात्मक, कम लागत वाले नागरिक हवाईअड्डे का निर्माण कार्य पूर्ण प्रतिबद्धता को पूरा किया है तथा अक्टूबर - 2017 से प्रचालन में है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुमोदन से राजस्थान सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बीच वर्ष 2009 में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। राज्य सरकार ने भाविप्रा को चरणबद्ध तरीके से लगभग 733.7810 एकड़ भूमि सौंप दी है कई बाधाओं, व्यावहारिक और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद निर्माण गतिविधियां निरंतर प्रगति पर हैं और अक्टूबर-2018 से Q-400 / एटीआर-72 प्रकार के विमानों का  नियमित उड़ान संचालन हो रहा है।

There was a small airstrip located at Kishangarh in the historic city of Ajmer in Rajasthan. It was occasionally used by the state government, visitors and businessmen to operate charter planes/helicopters. Immense possibilities at this place such as Asia's largest marble center, world famous Ajmer Sharif Dargah, Pushkar pilgrimage, Jain temple, Kishangarh art style, cultivation of rose flowers and henna, Central University of Rajasthan, Mayo College, Dumping Yard, Khoda Ganesh Temple, Gundolav Lake, Phool Mahal Palace, Navagraha Temple and many more places. This place is regularly visited by tourists, marble traders, artists and academicians. Hence there was a demand by the public for a fully developed airport here and the Airports Authority of India has fully committed to the construction of a modern, self-sustainable, state-of-the-art, low-cost civil airport meeting international standards and this airport is in operation since October - 2017.

The MoU was signed in the year 2009 between the Government of Rajasthan and the Airports Authority of India with the approval of the Ministry of Civil Aviation. The State Government has handed over approx. 733.7810 acres of land to AAI in a phased manner. Despite several constraints, practical and technical challenges, the construction activities are progressing steadily and regular flight operations of Q-400 / ATR-72 type aircraft are plying since October-2018.

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