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उद्देश्य :  - “राष्ट्र के आर्थिक विकास और समृद्धि में योगदान करते हुए ग्राहक की सम्पूर्ण संतुष्टि के लिए अत्याधुनिक अवसंरचना उपलब्ध कराते हुए विमान यातायात सेवाओं और हवाई अङ्ङा प्रबंधन में संरक्षा एवं गुणवत्ता के उच्चतम स्तर प्राप्त करना”                                                                                                                                                                                                                                                                                                                 ध्येय  :   - “विमान यातायात सेवाओ एवं हवाई अड्डा प्रबंधन में नेतृत्व करते हुए विश्वस्तरीय संगठन बनाना एवं २०१६ तक एशिया प्रशांत क्षेत्र में भारत को एक प्रमुख केंद्र बनाना"
संगठन

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (ए ए आई) का गठन संसद के एक अधिनियम द्वारा किया गया तथा यह तत्कालीन राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण तथा भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के विलय के माध्यम से 1 अप्रैल 1995 को अस्तित्व में आया। इस विलय से एक एकल संगठन अस्तित्व में आया जिसे देश में जमीन पर एवं वायु क्षेत्र में भी नागर विमानन अवसंरचना के सृजन, उन्नयन, अनुरक्षण एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण 125 विमानपत्तनों का प्रबंधन करता है जिसमें 11 अंतर्राष्ट्रीय विमानपत्तन, 8 सीमा शुल्क विमानपत्तन, 81 घरेलू विमानपत्तन तथा रक्षा वायु क्षेत्रों में 27 सिविल एंक्ले‍व शामिल हैं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण 2.8 मिलियन वर्ग नाटिकल मील के हवाई अंतरिक्ष में हवाई नेविगेशन की सुविधाएं उपलब्ध कराता है। वर्ष 2008-09 के दौरान भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने 1306532 [अंतर्राष्ट्रीय 270345 और घरेलू 1036187] एयरक्राफ्ट मूवमेंट को हैंडल किया, 44262137 [अंतर्राष्ट्रीय 1047614 और घरेलू 33785990] यात्रियों को हैंडल किया और 499418 टन [अंतर्राष्ट्रीय 318242 और घरेलू 181176] कार्गो को हैंडल किया।

1.या‍त्री सुविधाएं

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के मुख्य कार्यों में अन्य बातों के साथ यात्री टर्मिनलों का निर्माण, सुधार एवं प्रबंधन, कार्गो टर्मिनलों का विकास एवं प्रबंधन, रनवे, पैरलल टैक्सी वे, एप्रन आदि समेत एप्रन अवसंरचना का विकास एवं अनुरक्षण शामिल है। इसके प्रमुख कार्यों में अपने टर्मिनलों पर संचार, नेविगेशन एवं निगरानी का प्रावधान करना शामिल है जिसमें डी वी ओ आर / डी एम ई, आई एल एस, ए टी सी रडार, विजुअल एड्स आदि का प्रावधान, वायु ट्रैफिक सेवाओं का प्रावधान, यात्री सुविधाओं एवं संबद्ध सुविधाओं का प्रावधान शामिल है जिसके माध्यम से देश में एयरक्राफ्ट, यात्री एवं कार्गो का सुरक्षित एवं निरापद प्रचालन सुनिश्चित होता है।

2. वायु नेविगेशन सेवाएं

राज्य एवं क्षेत्रीय सीमाओं के पार दोष रहित नेविगेशन के लिए वायु नेविगेशन अवसंरचना के आधुनिकीकरण के प्रति वैश्विक दृष्टिकोण की तर्ज पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण उपग्रह आधारित संचार, नेविगेशन, निगरानी एवं वायु ट्रैफिक प्रबंधन अपनाने के लिए अपनी योजनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। उनके अनुभव का लाभ उठाने के लिए अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन, अमेरिकी व्यापार एवं विकास एजेंसी, यूरोपीय संघ, एयर सर्विसेज आस्ट्रेलिया तथा फ्रेंच गवर्नमेंट कोऑपरेटिव प्रोजेक्ट्स एंड स्टडीज के साथ अनेक सहयोग करार तथा सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन गतिविधियों के माध्य्म से भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अधिकाधिक कार्यपालक विमानपत्तनों एवं वायु नेविगेशन सेवाओं के समग्र निष्पादन में सुधार के लिए अपनाई जा रही नवीनतम प्रौद्योगिकी, आधुनिक प्रथाओं एवं प्रक्रियाओं से अवगत हो रहे हैं।

पुराने उपकरणों के प्रतिस्थापन के रूप में तथा हवा में विमानपत्तनों की सुरक्षा के मानकों में सुधार के लिए नई सुविधाओं के रूप में नवीनतम अधुनातन उपकरणों का आगमन एक सतत प्रक्रिया है। नई एवं परिष्कृत कार्यविधि का अंगीकरण नए उपकरण के आगमन के साथ-साथ होता है। इस दिशा में कुछ प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं – हवाई अंतरिक्ष क्षमता में वृद्धि तथा हवा में भीड़भाड़ कम करने के लिए भारतीय वायु क्षेत्र में रिड्यूस्ड वर्टिकल सेपरेशन मिनिमा (आर वी एस एम); इसरो के साथ संयुक्त रूप से जीपीएस एंड जीओ ऑगमेंटेड नेविगेशन (गगन), जो प्रचालित होने पर विश्व में इस तरह के चार सिस्टमों में से एक होगा।

3. सुरक्षा

सतत सुरक्षा परिवेश ने महत्‍वपूर्ण अधिष्‍ठापनों की सुरक्षा मजबूत करने की आवश्‍यकता पर बल दिया है। इस प्रकार न केवल किसी दुस्‍साहस को विफल करने के लिए अपितु समग्र रूप में हवाई यात्रा की सुरक्षा में यात्रा करने वाले लोगों का विश्‍वास, जो 9/11 की त्रासदी के बाद डिग गया था, बहाल करने के लिए भी विमानपत्‍तनों पर सुरक्षा सुदृढ़ करने की तत्‍काल आवश्‍यकता थी। इसे ध्‍यान में रखते हुए अनेक कदम उठाए गए जिसमें विमानपत्‍तनों की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ की तैनाती, संवेदनशील विमानपत्‍तनों पर सीसीटीवी निगरानी प्रणाली, नवीनतम एवं अधुनातन एक्‍सरे बैगेज निरीक्षण प्रणाली, प्रीमियर सुरक्षा एवं निगरानी प्रणाली शामिल है। विमानपत्‍तनों पर महत्‍वपूर्ण अधिष्‍ठापनों में अक्‍सेस को नियंत्रित करने के लिए स्‍मार्ट कार्ड पर भी विचार किया जा रहा है ताकि संवेदनशील विमानपत्‍तनों पर सुरक्षा कार्मिकों के प्रयासों को संपूरित किया जा सके।


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4. हवाई अड्डा की सुविधाएं

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में, विमानपत्तन की सुविधाओं की योजना के प्रति अपनाया गया बुनियादी दृष्टिकोण यह है कि हमारे प्रयास मांग से अधिक क्षमता सृजित करने पर केंद्रित हों। इस कार्यनीति को कार्यान्वित करने के लिए विभिन्न विमानपत्तनों पर रनवे, टैक्सी ट्रैक एवं एप्रन के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के लिए अनेक परियोजनाएं हाथ में ली गई हैं। सभी विमानपत्तनों पर एयर बस-320 / बोइंग 737-800 श्रेणी के हवाई जहाजों के प्रचालन में सहायता के लिए रनवे को 7500 फीट तक बढ़ाने का कार्य हाथ में लिया गया है।


5. एचआरडी प्रशिक्षण

प्रशिक्षित एवं अत्यधिक कुशल जनशक्ति का एक विशाल पूल भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की प्रमुख परिसंपत्तियों में से एक है। विकास एवं प्रौद्योगिकी में उन्नति तथा प्रचालन मानकों एवं कार्यविधियों में परिणामी परिष्करण, सुरक्षा एवं संरक्षा के नए मानक तथा प्रबंधन की तकनीकों में सुधार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के ज्ञान एवं कौशल को अपडेट करने के लिए निरंतर प्रशिक्षण का आह्वान करते हैं। इस प्रयोजनार्थ अपने इंजीनियरों, वायु ट्रैफिक नियंत्रकों, बचाव एवं अग्निशमन कार्मिकों आदि को अपने यहां प्रशिक्षण देने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अनेक प्रशिक्षण स्थापनाएं अर्थात दिल्ली में एनआईएएमएआर, इलाहाबाद में सी ए टी सी, दिल्ली एवं कोलकाता में अग्नि प्रशिक्षण केंद्र हैं। एनआईएएमएआर एवं सीएटीसी आईसीएओ ट्रेनर कार्यक्रम के सदस्यो हैं जिसके अंतर्गत वे विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए केंद्रीय पूल से मानक प्रशिक्षण पैकेज (एसटीपी) साझा करते हैं। सीएटीसी एवं एनआईएएमएआर दोनों ने आईसीएओ ट्रेनर कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय पूल में अनेक एसटीपी का भी योगदान किया है। इन संस्थाओं द्वारा संचालित किए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम में विदेशी छात्र भी भाग ले रहे हैं।


6. आईटी का कार्यान्वयन

सूचना प्रौद्योगिकी प्रचालनात्मक एवं प्रबंधकीय दक्षता, पारदर्शिता एवं कर्मचारियों की उत्पादकता की कुंजी है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने अपने कर्मचारियों में आईटी संस्कृ‍ति विकसित करने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया है तथा यह इस संगठन में दक्षता बढ़ाने का सबसे सशक्तक साधन है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की वेबसाइट, जिसका नाम www.airportsindia.org.in या www.aai.aero है, एक लोकप्रिय वेबसाइट है जो घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के बारे में अनेक तरह की सूचनाएं प्रदान करती है। यह विशेष रूप से यात्रियों के हित की सूचनाओं के साथ-साथ सामान्यतया आम जनता के हित की सूचनाएं भी प्रदान करती है।


भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बोर्ड के सदस्य

डॉ. गुरुप्रसाद मोहपात्रा, भा. प्र. से. चेयरमैन
   
पदेन सदस्य:  
   
बी एस भुल्लर, भा. प्र. से. महानिदेशक नागर विमानन
   
अंशकालिक सदस्य (आधिकारिक):  
   
श्री अरूण कुमार संयुक्त सचिव, नागर विमानन मंत्रालय
सुश्री गार्गी कॉल संयुक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार, नागर विमानन मंत्रालय
   
पूर्णकालिक सदस्य  

 
श्री एस. रहेजा सदस्य (योजना)
श्री आई एन मूर्ति सदस्य (प्रचालन)
श्री एस. सुरेश सदस्‍य (वित्‍त)
श्री अनुज अग्रवाल सदस्‍य (मानव संसाधन)
श्री ऐ. के. दत्ता सदस्‍य (एएनएस)
   
अंशकालिक सदस्य (गैर-आधिकारिक):  
   
रिक्त --
 

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भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के कार्य

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के कार्य इस प्रकार हैं:

  1. अंतर्राष्ट्रीय एवं घरेलू विमानपत्तनों तथा सिविल एंक्लेरव की डिजाइन, विकास, प्रचालन एवं अनुरक्षण।
  2. आईसीएओ द्वारा यथा स्वीकृत देश की भौगोलिक सीमाओं के बाद भारतीय वायु अंतरिक्ष का नियंत्रण एवं प्रबंधन।
  3. यात्री टर्मिनलों का निर्माण, सुधार एवं प्रबंधन।
  4. अंतर्राष्ट्रीय एवं घरेलू विमानपत्तनों पर कार्गो टर्मिनलों का विकास एवं प्रबंधन।
  5. विमानपत्त्नों के यात्री टर्मिनलों पर यात्री सुविधाओं एवं सूचना प्रणाली का प्रावधान।
  6. प्रचालन क्षेत्र अर्थात रनवे, एप्रन, टैक्सी वे आदि का विस्ता्र एवं सुदृढ़ीकरण।
  7. विजुअल एड्स का प्रावधान।
  8. संचार एवं नेविगेशन एड्स अर्थात आईएलएस, डीवीओआर, डीएमई, रडार आदि का प्रावधान।

अंतिम अद्यतनीकरण की तिथि : 01 दिसम्बर 2016