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संचार, दिक्‍चालन एवं निगरानी (योजना)

सभी संचार, दिक्‍चालन एवं निगरानी (सी एन एस) सुविधाओं तथा इकाओ की अनुमोदित योजनाओं के साथ संगठन की योजना को तुल्‍यकालिक बनाने के लिए अल्‍प अवधि एवं दीर्घ अवधि की आवश्‍यकताओं के आधार पर विमान दिक्‍चालन के लिए सहायता प्रणालियों की योजना, प्रापण एवं अधिष्‍ठापन का प्रबंधन सी एन एस योजना विभाग द्वारा किया जाता है। सभी संबंधित एजेंसियों/संगठनों के साथ मिलकर गुणात्‍मक अपेक्षाओं तथा प्रणाली के विनिर्देशनों को तैयार करना, प्राक्‍कलन तैयार करना, निविदाएं आमंत्रित करना, वाणिज्यिक एवं तकनीकी बोलियों के लिए निविदा का मूल्‍यांकन करना, आर्डर देना, फैक्‍ट्री में जाकर उपकरणों का निरीक्षण करना और बाद में उनका इंस्‍टालेशन एवं अधिष्‍ठापन करना ऐसी जिम्‍मेदारियां हैं जिन्‍हें सी एन एस योजना विभाग निभाता है। तकनीक एवं प्रचालन के आधार पर उपयुक्‍तता की दृष्टि से उपकरण को अवस्थित करने के लिए स्‍थल का सर्वेक्षण करना, इंस्‍टालेशन एवं अधिष्‍ठापन के लिए निर्माण से संबद्ध गतिविधियों के लिए योजना बनाना, सिविल एवं विद्युत इंजीनियरिंग विभागों के साथ समन्‍वय स्‍थापित करना, इंस्‍टालेशन के बाद निष्‍पादन की जांच करना और उपकरण के संस्‍थापन से पूर्व फ्लाइट कैलिब्रेशन का आयोजन करना आदि ऐसे पहलू हैं जो इस प्रक्रिया में अभिन्‍न रूप से शामिल हैं।

सैट काम आधारित वायु यातायात प्रबंधन के लिए इकाओ सीएनएस एटीएम ट्रांजिशन प्‍लान द्वारा उत्‍पन्‍न चुनौतियों को पूरा करने के लिए सी एन एस ने पहले ही निपुणता हासिल कर ली है।

आटोमेटिक डिपेंडेंट सर्विलांस (ए डी एस)
टोमेटिक डिपेंडेंट सर्विलांस (एडीएस) पहले ही स्‍थापित किया जा चुका है तथा चेन्‍नई, कोलकाता, दिल्‍ली एवं मुंबई के हवाईअड्डों पर प्रचालन के लिए इसका सफल परीक्षण किया गया है।

सैट कॉम नेटवर्क

संपूर्ण भारतीय वायु क्षेत्र पर वी एच एफ कवरेज प्रदान करने के लिए रिमोट से नियंत्रित एयर ग्राउंड वी एच एफ संचार, रडारों की नेटवर्किंग तथा ए टी एस डाटा संचार समेत डाटा एवं ध्‍वनि संचार की सहायता के लिए अखिल भारतीय स्‍तर पर 80 हवाईअड्डों पर समर्पित सैट कॉम नेटवर्क के कार्यान्‍वयन का कार्य प्रगति पर है।

क्षेत्र संवर्धन प्रणाली

एयर स्‍पेस के लिए इसरो के साथ मिलकर स्‍पेस आधारित संवर्धन प्रणाली अर्थात गगन शुरू की गई है। शुरूआती तकनीकी प्रदर्शन चरण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है तथा पूर्ण प्रचालन चरण 2013 तक पूरा हो जाने वाला है।

 

आखिरी बार अपडेट करने की तारीख : 06 जनवरी, 2010