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उद्देश्य :  - “राष्ट्र के आर्थिक विकास और समृद्धि में योगदान करते हुए ग्राहक की सम्पूर्ण संतुष्टि के लिए अत्याधुनिक अवसंरचना उपलब्ध कराते हुए विमान यातायात सेवाओं और हवाई अङ्ङा प्रबंधन में संरक्षा एवं गुणवत्ता के उच्चतम स्तर प्राप्त करना”                                                                                                                                                                                                                                                                                                                 ध्येय  :   - “विमान यातायात सेवाओ एवं हवाई अड्डा प्रबंधन में नेतृत्व करते हुए विश्वस्तरीय संगठन बनाना एवं २०१६ तक एशिया प्रशांत क्षेत्र में भारत को एक प्रमुख केंद्र बनाना"
हवाईअड्डा लेखा परीक्षा, वाणिज्यिक एवं कार्गो

हवाईअड्डा लेखा परीक्षा

प्रत्‍येक हवाईअड्डा के कार्य निष्‍पादन की वार्षिक लेखा परीक्षा वास्‍तव में भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण की एक नियमित विशेषता रही है। यह कार्य ज्‍यादातर स्‍वयं विभागों द्वारा संचालित किया जाता है। पिछले वर्षों में प्रत्‍येक विभाग में विशिष्‍ट लोगों ने बोर्ड के मिशन की ओर उन्‍मुख करने के लिए तथा भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण के बोर्ड द्वारा निर्धारित वार्षिक लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए आवश्‍यक प्रणालीगत परिवर्तन को प्रकाश में लाने के लिए हवाईअड्डा के कार्य निष्‍पादन की लेखा परीक्षा संचालित करने में विशेषज्ञता हासिल की है।

किसी भी हवाईअड्डे पर संबंधित के विशिष्‍ट क्षेत्रों के लिए अथवा संपूर्ण हवाईअड्डे के लिए हवाईअड्डा लेखा परीक्षा संचालित करने के लिए भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण आयोजना, इंजीनियरिंग, प्रचालन, वाणिज्यिक, कार्गो एवं कार्पोरेट योजना तथा एम एस विभागों से विशेषज्ञों का एक दल शीघ्रता से संगठित कर सकता है।

वाणिज्यिक  

हवाईअड्डों की आर्थिक व्‍यवहार्यता सबसे अधिक महत्‍वपूर्ण हो गई है तथा हवाईअड्डों का निजीकरण करने तथा उन्‍हें आर्थिक दृष्टि से आत्‍मनिर्भर बनाने के रूझान ने पूरी दुनिया में जोर पकड़ लिया है। हवाईअड्डा स्‍थापित करने की पूंजी गहन प्रकृति से प्रचालन जारी रखने तथा विकास बनाए रखने के लिए अप्रत्‍याशित मात्रा में राजस्‍व का सृजन करने की चुनौती पैदा होती है।

यातायात संबद्ध राजस्‍व में वृद्धि की संभावना सीमित होने के कारण पूरे विश्‍व में हवाईअड्डा की उपलब्‍ध अवसंरचना के अधिक वाणिज्यिक दोहन, परिष्‍कृत एवं प्रतिस्‍पर्धी यात्री शॉपिंग सुविधाओं, विज्ञापन आदि के जरिए गैर यातायात राजस्‍व में वृद्धि पर बल दिया जा रहा है तथा ये ऐसे विषय हैं जिनके लिए एयरपोर्ट के वाणिज्यिक प्रबंधन के मामले में व्‍यावसायिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।

1990 के दशक की शुरूआत में भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण के कुल राजस्‍व में गैर यातायात राजस्‍व का अनुपात 10-15 प्रतिशत था। आज भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण के कुल राजस्‍व में गैर यातायात राजस्‍व का अनुपात बढ़कर 20-30 प्रतिशत हो गया है, जबकि ब्रिटिश एयरपोर्ट अथॉरिटी (बी ए ए) यातायात से भिन्‍न स्रोतों से अपने राजस्‍व का 70 प्रतिशत सृजित करती है। पिछले 5-6 वर्षों में कार्गो राजस्‍व में लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण ने पिछले 10-12 वर्षों में वाणिज्यिक पहलुओं के क्षेत्र में विशेषज्ञों के एक दल का विकास किया है तथा जो अनुभव हासिल हुआ है उसके आधार पर यह दल हवाईअड्डों की वित्‍तीय व्‍यवहार्यता में सुधार लाने में अन्‍य हवाईअड्डा प्रचालकों को सहायता प्रदान कर सकता है।  

कार्गो

औसतन 10 साल के अनुभव वाले 157 व्‍यावसायिक कार्यपालकों से युक्‍त कार्गो विभाग कोलकाता (1975), चेन्‍नई (1978) और दिल्‍ली (1986) में गेटवे एयर कार्गो टर्मिनल की स्‍थापना के साथ धीरे-धीरे विकसित हुआ है।

दिल्‍ली स्थित एकीकृत एयर कार्गो टर्मिनल पर निर्यात/आयात ट्रांजिट कार्गो को हैंडल करने की सुविधाएं हैं। यहां स्थित कार्गो प्रबंधन सिस्‍टम का उन्‍नयन किया गया है तथा इलैक्ट्रानिक डाटा इंटरचेंज (ई डी आई) एवं बार कोडिंग क्षमता के साथ पूर्णत: कंप्‍यूटरीकृत ''आन लाइन’’ एकीकृत कार्गो प्रबंधन प्रणाली स्‍थापित की गई है। मुंबई, चेन्‍नई एवं कोलकाता स्थित कार्गो प्रबंधन प्रणालियां भी कंप्‍यूटरीकृत हैं, हालांकि अभी तक यहां ''आन लाइन सिस्‍टम’’ नहीं है। दिल्‍ली में, लो‍डेड पैलेट एवं कंटेनर को हैंडल करने के लिए मल्‍टी लेवल ई टी वी सिस्‍टम को एक अतिरिक्‍त ई टी वी सिस्‍टम द्वारा संवर्धित किया जा रहा है‍ जिससे 284 की वर्तमान स्‍लाट क्षमता में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

दिल्‍ली में ‘प्री कूलिंग’ चैंबर, फलों, फूलों, फ्रोजन उत्‍पादों आदि के लिए स्‍वतंत्र चैंबर के साथ एक क्षरणशील कार्गो हैंडलिंग टर्मिनल काम कर रहा है। मुंबई हवाईअड्डे पर एक बहुत बड़े क्षरणशील कार्गो टर्मिनल की योजना बनाई गई है, जहां कुल एयर कार्गो में क्षरणशील कार्गो का अनुपात 40 प्रतिशत होता है।

भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण के एयर कार्गो टर्मिनलों पर ट्रक डॉक, स्‍ट्रांग रूम, लाइव एनिमल शेड, हानिकर कार्गो गोदाम, पैलेटाइजेशन स्‍टेशन, एयरलाइनों, सरकारी विनियामक एजेंसियों, मल्‍टी मॉडल कार्गो ऑपरेटरों, ब्रेक बल्‍क एजेंट, कॉसोलिडेटर के लिए कार्यालय का प्रावधान होता है ताकि प्रचालन में कोई दिक्‍कत न आए और प्रयोक्‍ताओं को सुविधा प्राप्‍त हो। सुरक्षा संबंधी मानकों को पूरा करने के लिए सी सी टी वी सिस्‍टम, एक्‍सरे स्‍कैनर आदि उपलब्‍ध कराए गए हैं।   

गेटवे एयरपोर्ट कार्गो टर्मिनल साथ मिलकर हर साल एक मिलियन टन आयात/निर्यात/ट्रांजिट कार्गो को हैंडल करने में सक्षम हैं। वर्तमान में विद्यमान क्षमता का लगभग 75-80 प्रतिशत उपयोग होता है।

कार्गो विभाग से संपर्क स्‍थापित करके भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण के योजना एवं इंजीनियरिंग विभागों द्वारा सभी एयर कार्गो टर्मिनल की डिजाइन एवं निर्माण का कार्य किया गया है। भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण द्वारा काठमांडू, नेपाल में एयर कार्गो टर्मिनल के लिए संभाव्‍यता अध्‍ययन किया गया। भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण न केवल कार्गो टर्मिनल की डिजाइन, विकास एवं निर्माण का कार्य संपन्‍न करने में सक्षम है अपितु उनका प्रबंधन एवं प्रचालन करने में भी सक्षम है।